प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने भारतीय रेलवे की तीन बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। लगभग 23,437 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और आर्थिक विकास को नई गति देना है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर इस फैसले को भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बड़ा कदम बताया है। उनके अनुसार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 19 जिलों में इन परियोजनाओं के शुरू होने से न केवल कनेक्टिविटी बढ़ेगी, बल्कि रेलवे की परिचालन क्षमता में भी अभूतपूर्व सुधार होगा।
वर्ष 2030-31 तक पूरा होने वाली इन योजनाओं के तहत भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 901 किलोमीटर की बढ़ोतरी की जाएगी। इन अहम प्रोजेक्ट्स में नागदा-मथुरा, गुंटकल-वाडी और बुरहवाल-सीतापुर रूट पर तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण शामिल है। इन नई लाइनों के बन जाने से ट्रेनों की आवाजाही पहले से कहीं अधिक सुगम हो जाएगी, जिससे ट्रेनों की देरी में कमी आएगी और यात्रियों को अधिक भरोसेमंद सेवा मिल सकेगी। यह पूरा प्रोजेक्ट पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार किया गया है, जो मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और बेहतर लॉजिस्टिक्स सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इन परियोजनाओं का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी व्यापक होगा क्योंकि ये करीब 4,000 गांवों और लगभग 83 लाख की आबादी को सीधे तौर पर जोड़ेंगी। इसके अलावा महाकालेश्वर, रणथंभौर, केवलादेव नेशनल पार्क, मथुरा, वृंदावन और नैमिषारण्य जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा। व्यावसायिक दृष्टि से देखें तो इन लाइनों के विस्तार से कोयला, सीमेंट और लोहे जैसे जरूरी सामानों की सालाना माल ढुलाई क्षमता में 60 मिलियन टन का इजाफा होगा। इससे न केवल माल ढुलाई की लागत कम होगी, बल्कि सालाना 37 करोड़ लीटर तेल की बचत और कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कटौती होने से पर्यावरण को भी लाभ पहुंचेगा।
