आपदा पूर्व तैयारी अभियान के अंतर्गत पौड़ी जिले के कोटद्वार, पौड़ी, थलीसैंण और धुमाकोट क्षेत्रों में विभिन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अभ्यास कराया गया। इस दौरान संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों का परीक्षण किया गया और संबंधित विभागों की तत्परता परखा गया।
अभ्यास के सुचारु संचालन के लिए कलेक्ट्रेट सभागार में आपदा नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया, जहां से पूरे अभियान की निगरानी की गई। थलीसैंण क्षेत्र के केन्यूर में भूस्खलन की स्थिति, नागदेव क्षेत्र बुवाखाल में वनाग्नि तथा कोटद्वार के ऊपरी इलाकों में भारी वर्षा के कारण खोह नदी का जलस्तर बढ़ने जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग स्थानों पर राहत और बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया।
कोटद्वार क्षेत्र की झुलाबस्ती में नदी का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सोलह परिवारों के लोगों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया गया। इस दौरान जिला प्रशासन के साथ राहत एवं बचाव दल, पुलिस, अग्निशमन विभाग और अन्य संबंधित विभाग सक्रिय रूप से मौजूद रहे।
अधिकारियों ने पूरे अभियान के दौरान समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और संसाधनों के उपयोग की समीक्षा की। प्रशासन का कहना है कि अभ्यास के दौरान जो कमियां सामने आई हैं, उन्हें चिन्हित कर दूर किया जाएगा ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत कार्य और अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकें।
