नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी 106वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम 2023 कल से पूरे देश में प्रभावी हो गया है। संसद द्वारा 2023 में पारित यह कानून संघीय ढांचे के सभी स्तरों पर सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के समान प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने के लिए भारत की राष्ट्रीय यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह युगांतरकारी कानून लोकसभा, सभी राज्य विधानसभाओं और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें रोटेशन के आधार पर आरक्षित करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोशल मीडिया पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए जोर देकर कहा कि नारी शक्ति एक मजबूत भारत की पहचान है। उन्होंने देश की माताओं, बहनों और बेटियों के अटूट संकल्प, भक्ति और सेवा भाव की सराहना करते हुए कहा कि वे आज हर क्षेत्र में भारतवर्ष का गौरव बढ़ा रही हैं। इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि पुराने कानूनों को लागू करने की प्रक्रिया के तहत ही नारी शक्ति वंदन अधिनियम की अधिसूचना जारी की गई है। उन्होंने संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए विपक्ष से इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति न करने का आग्रह किया।
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने इस विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह विपक्ष के लिए अपनी पुरानी गलतियों को सुधारने का एक सुनहरा अवसर है। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर महिलाओं के उत्थान के लिए पर्याप्त कदम न उठाने का आरोप भी लगाया। जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद संजय झा ने भी इस कदम का स्वागत करते हुए इसे लंबे समय से प्रतीक्षित निर्णय बताया। उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पंचायतों में 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं चुनी गई हैं, जिससे महिला नेतृत्व का एक मजबूत आधार तैयार हुआ है। छत्तीसगढ़ से भाजपा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने इस पल को गर्व का विषय बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देश की लगभग आधी आबादी को नेतृत्व और नीति-निर्धारण में लाने से ‘विकसित भारत’ के विजन 2047 को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।
