एम्स नई दिल्ली के बर्न्स एंड प्लास्टिक सर्जरी ब्लॉक में 24 से 26 अप्रैल 2026 तक तीन दिवसीय “एस्थेटिक सर्जरी अपडेट 2026” सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में देशभर और पड़ोसी देशों से आए 280 से अधिक प्लास्टिक सर्जन हिस्सा ले रहे हैं, जो सौंदर्य चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम वैज्ञानिक परिवर्तनों और तकनीकी उन्नति पर गहन मंथन कर रहे हैं। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सर्जरी से जुड़ी अत्याधुनिक तकनीकों, सुरक्षित प्रक्रियाओं और बेहतर प्रशिक्षण विधियों पर चर्चा करना है ताकि देश में इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र को एक नई और सुरक्षित दिशा दी जा सके।
भारत आज एस्थेटिक सर्जरी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर छठे स्थान पर काबिज हो चुका है, जो यह स्पष्ट करता है कि सौंदर्य चिकित्सा के प्रति लोगों का रुझान और स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है। एम्स के बर्न्स एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. मनीष सिंघल के अनुसार, इस क्षेत्र की मांग देश में निरंतर बढ़ रही है। यदि आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2024 में देश में लगभग 12 लाख एस्थेटिक प्रक्रियाएं की गईं, और अनुमान है कि 2025 में यह आंकड़ा 15 लाख को पार कर गया है। एम्स का प्लास्टिक, रिकंस्ट्रक्टिव और बर्न्स सर्जरी विभाग स्वयं सर्जिकल और नॉन-सर्जिकल दोनों ही तरह की अत्याधुनिक प्रक्रियाएं उपलब्ध कराता है, जिनमें हेयर ट्रांसप्लांट, लिपोसक्शन, फेसलिफ्ट, राइनोप्लास्टी, लेज़र ट्रीटमेंट, बोटुलिनम टॉक्सिन और डर्मल फिलर्स जैसी सेवाएं शामिल हैं।
बर्न्स एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग की सहायक प्रोफेसर शिवांगी साहा ने इस विषय पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि एस्थेटिक सर्जरी की मांग अब समाज के सभी वर्गों और आयु समूहों में व्यापक रूप से देखी जा रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह सर्जरी अब केवल बाहरी रूप को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के आत्मविश्वास को बहाल करने, मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाने और उनके सामाजिक जीवन में नए अवसर पैदा करने में भी एक सकारात्मक भूमिका निभाती है।
सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने इस बढ़ते बाजार में सुरक्षा, नैतिकता और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। डॉ. मनीष सिंघल ने स्पष्ट किया कि एम्स जैसे राष्ट्रीय संस्थानों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे एस्थेटिक सर्जरी में सुरक्षित, पारदर्शी और संरचित प्रशिक्षण को बढ़ावा दें। इस दिशा में एम्स नई दिल्ली के साथ-साथ एम्स पटना, भुवनेश्वर और पीजीआई चंडीगढ़ जैसे संस्थान मिलकर सक्रिय पहल कर रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रो. मनीष सिंघल के साथ डॉ. राजा तिवारी, डॉ. राज कुमार मानस, डॉ. अपर्णा सिन्हा, डॉ. रूपावत राम कुमार और डॉ. सुरभि गुप्ता जैसे प्रख्यात विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे। यह सम्मेलन न केवल नई तकनीकों को साझा करने का एक मंच है, बल्कि सुरक्षित और नैतिक चिकित्सा प्रथाओं के माध्यम से भारत में एस्थेटिक सर्जरी के भविष्य को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
