राजधानी देहरादून में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के प्रति अपनी तैयारियों को परखने के उद्देश्य से शुक्रवार देर रात एक व्यापक और हाई-प्रोफाइल मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का मुख्य लक्ष्य ‘एयर अटैक’ जैसी गंभीर और आकस्मिक परिस्थितियों में सरकारी तंत्र की सतर्कता, विभिन्न विभागों के बीच आपसी तालमेल और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का सटीक परीक्षण करना था। जैसे ही मॉक ड्रिल का संकेत प्राप्त हुआ, पूरे शहर में तत्काल प्रभाव से ‘ब्लैकआउट’ लागू कर दिया गया, जिसके चलते राजधानी की सड़कें और सार्वजनिक स्थल अंधेरे में डूब गए। यह अभ्यास वास्तविक युद्ध या हवाई हमले जैसी स्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था, जिसमें देहरादून के प्रमुख स्थानों जैसे घंटाघर, आईएसबीटी, आराघर और रायपुर को लक्षित करते हुए ‘बमबारी’ के काल्पनिक परिदृश्य बनाए गए थे।
इस चुनौतीपूर्ण अभ्यास के दौरान प्रशासन, पुलिस, सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की संयुक्त टीमों ने पूरी सक्रियता के साथ राहत और बचाव कार्यों का मोर्चा संभाला। अभ्यास के दौरान टीमों ने न केवल काल्पनिक बमबारी से प्रभावित क्षेत्रों की घेराबंदी की, बल्कि मलबे में फंसे घायलों को कुशलतापूर्वक बाहर निकालकर उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाने का सफल अभ्यास भी किया। इस दौरान सुरक्षा बलों ने अत्यधिक सावधानी बरतते हुए बम निरोधक दस्तों के साथ मिलकर संदिग्ध वस्तुओं और विस्फोटकों को निष्क्रिय करने की तकनीक का भी प्रदर्शन किया। साथ ही, हमले के बाद ठप हुई आपातकालीन सेवाओं को कम से कम समय में पुनः बहाल करने की व्यवस्थाओं का भी कड़ाई से परीक्षण किया गया।
इस मॉक ड्रिल के माध्यम से न केवल विभागों के बीच समन्वय को परखा गया, बल्कि वास्तविक आपदा की स्थिति में संसाधनों के सही और त्वरित उपयोग की रणनीति भी तैयार की गई। अधिकारियों ने इस दौरान अभ्यास में शामिल प्रत्येक प्रक्रिया का बारीकी से निरीक्षण किया ताकि भविष्य में किसी भी वास्तविक आपात स्थिति का सामना करने के लिए सुरक्षा तंत्र को और अधिक अभेद्य और प्रभावी बनाया जा सके। इस तरह के अभ्यासों का मुख्य उद्देश्य किसी भी अनहोनी की स्थिति में जन-धन की हानि को न्यूनतम रखना और शासन-प्रशासन के स्तर पर तैयारियों को त्रुटिहीन बनाना है, ताकि राजधानी के नागरिक सुरक्षित रह सकें।
