भारत अपनी आगामी 2027 की जनगणना को ऐतिहासिक रूप में आयोजित करने जा रहा है, जो देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी। हाल ही में जारी आधिकारिक फैक्ट-शीट के अनुसार, इस जनगणना में डेटा संकलन की पूरी प्रक्रिया मोबाइल-आधारित होगी, जिससे न केवल डेटा की सटीकता बढ़ेगी बल्कि प्राप्त होने वाली विस्तृत जानकारी भविष्य की नीति निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। इस डिजिटल पहल के तहत कई अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाएं शामिल की गई हैं, जिसमें ‘सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम’ (सीएमएमएस) पोर्टल के माध्यम से डेटा की रियल-टाइम निगरानी, स्वयं के द्वारा जानकारी भरने (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का विकल्प और जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों का व्यापक उपयोग प्रमुख हैं।
इस जनगणना की एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता इसमें जातिगत गणना को शामिल किया जाना है। राजनैतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 30 अप्रैल 2025 को आयोजित अपनी बैठक में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया था कि 2027 की जनगणना में जातिगत डेटा को भी स्थान दिया जाएगा, जबकि 2011 तक केवल अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की ही व्यवस्थित गणना होती रही थी। इस व्यापक और जटिल प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सरकार ने 11,718.24 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया है, जिसमें डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहद मजबूत और अभेद्य इंतजाम किए गए हैं।
दो चरणों में विभाजित यह जनगणना पूरे देश में व्यवस्थित तरीके से संपन्न होगी। सरकार का मानना है कि सुरक्षित डेटा सेंटर और कार्यबल की व्यापक पहुंच के साथ यह जनगणना अत्यंत विश्वसनीय जानकारी प्रदान करेगी। यह डेटा जनसंख्या के रुझानों को समझने के साथ-साथ भोजन, पानी, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे जैसी महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की बेहतर योजना बनाने में सहायक सिद्ध होगा। स्थानीय स्तर पर प्राप्त होने वाली सटीक जानकारी सरकारी योजनाओं को सही लाभार्थियों तक पहुंचाने की दिशा में अत्यंत प्रभावी होगी।
स्वतंत्रता के बाद यह भारत की आठवीं जनगणना है, जो अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में कहीं अधिक विस्तृत और अपडेटेड होगी। यह बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश के अनुरूप नीतियों को आकार देने का आधार बनेगी। जनगणना वास्तव में जनसांख्यिकीय, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक आंकड़ों का एक ऐसा महाकुंभ है, जो योजनाकारों, प्रशासकों, शोधकर्ताओं और अन्य डेटा उपयोगकर्ताओं के लिए साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाता है। दुनिया की सबसे बड़ी इस जनगणना प्रक्रिया में तकनीक और डेटा सुरक्षा का तालमेल देश के गवर्नेंस मॉडल को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, जिससे समावेशी नीति निर्माण को एक नया आयाम मिलेगा।
