शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में असाधारण योगदान देने वाले 82 शिक्षकों और शिक्षाविदों को ‘राष्ट्रीय पुरस्कार’ से सम्मानित किया। यह पुरस्कार मुख्य रूप से तीन अलग-अलग श्रेणियों से चुने गए शिक्षकों को प्रदान किए गए—जिसमें स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के 48 शिक्षक, उच्च शिक्षण संस्थानों व पॉलिटेक्निक के 21 फैकल्टी सदस्य, और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के 13 कौशल प्रशिक्षक शामिल हैं।
इस वर्ष शिक्षकों द्वारा लागू की गई नवोन्मेषी पद्धतियों जैसे सचल वैज्ञानिक प्रयोगशाला, रीसायकल सामग्री से निर्मित आउटडोर साइंस पार्क, रीडिंग कैंपेन और ‘ट्री टॉक’ (क्यूआर कोड आधारित वनस्पति अध्ययन प्रणाली) जैसी पहलों को विशेष रूप से सराहा गया।
प्रमुख पुरस्कार विजेताओं की उपलब्धियां:
- दिव्येंदु सेन (झालावाड़, राजस्थान): महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय के शिक्षक दिव्येंदु सेन को वर्चुअल बायोलॉजी लैब, एआई आधारित जीवविज्ञान शिक्षा और क्यूआर कोड आधारित ‘ट्री टॉक’ जैसे कम लागत वाले एसटीईएम (STEM) समाधान विकसित करने के लिए सम्मानित किया गया।
- सुनीता यादव (खिचड़ी, छत्तीसगढ़): राजकीय मध्य विद्यालय की शिक्षिका सुनीता यादव को सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने वाली ‘न्योता भोजन’ पहल और घर-घर पुस्तक वाचन अभियान के लिए पुरस्कार मिला। इनकी कोशिशों से स्कूल में 100% मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN) का लक्ष्य हासिल हुआ।
- कुंडा जयवंत बछाव (नासिक, महाराष्ट्र): 150 से अधिक जरूरतमंद बालिकाओं को आर्थिक व शैक्षणिक मदद देकर बाल विवाह रोकने और उच्च शिक्षा के अवसर दिलाने के लिए इन्हें सम्मानित किया गया। इन्होंने सीएसआर माध्यम से 55 लाख रुपये से अधिक का फंड जुटाकर समावेशी शिक्षा को बढ़ावा दिया।
- रवि जायसवाल (चंडीगढ़): राजकीय आदर्श माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक रवि जायसवाल को सीवी रमन डोम थिएटर, वाहन-संचालित मोबाइल साइंस लैब और रीसायकल सामग्री से इंटरेक्टिव साइंस पार्क बनाने जैसे इनोवेटिव मॉडल्स के लिए सम्मानित किया गया।
- रेनू त्रिपाठी (गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश): राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की शिक्षिका रेनू त्रिपाठी को 60 गांवों के ड्रॉपआउट और स्कूल न जाने वाले बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के असाधारण प्रयासों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया।
