पाकिस्तान के बलूचिस्तान को लेकर अलगाववादी आंदोलन ने एक बार फिर स्वतंत्रता की मांग को तेज कर दिया है। तथाकथित “रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान” ने 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस घोषित करते हुए दुनिया के देशों से एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की अपील की है। हालांकि, इस घोषणा को अभी तक किसी अंतरराष्ट्रीय सरकार या प्रमुख वैश्विक संगठन ने आधिकारिक मान्यता नहीं दी है।
बलूच कार्यकर्ता और स्वतंत्रता समर्थक मीर यार बलूच ने जुलाई 2026 में पाकिस्तान से बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की घोषणा करने का दावा किया था। इसके बाद स्वतंत्रता समर्थक समूहों ने 11 अगस्त को बलूचिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया। सोशल मीडिया पर जारी संदेशों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तथाकथित रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान को राजनयिक मान्यता देने की मांग की गई है।
बलूच स्वतंत्रता आंदोलन लंबे समय से पाकिस्तान से अलग एक स्वतंत्र बलूच राष्ट्र की मांग करता रहा है। आंदोलन से जुड़े नेताओं का आरोप है कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगों का पर्याप्त अधिकार नहीं है और राजनीतिक तथा आर्थिक अधिकारों को लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ है।
हालांकि, स्वतंत्रता की घोषणा और किसी क्षेत्र का वास्तविक रूप से स्वतंत्र राष्ट्र बन जाना दो अलग-अलग बातें हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान अभी भी बलूचिस्तान पर प्रशासनिक और सुरक्षा नियंत्रण बनाए हुए है। स्वतंत्रता समर्थक समूहों द्वारा क्षेत्र के बड़े हिस्से पर नियंत्रण के किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बलूचिस्तान को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है।
11 अगस्त की तारीख का भी ऐतिहासिक संदर्भ है। बलूच स्वतंत्रता समर्थक इसे 1947 में कलात के राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ते हैं और इसी आधार पर इस दिन को स्वतंत्रता दिवस के रूप में प्रस्तुत करते हैं। हालांकि, इतिहासकारों और विभिन्न स्रोतों में उस दौर की संवैधानिक और राजनीतिक स्थिति को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं।
इस घटनाक्रम ने दक्षिण एशिया में एक बार फिर बलूचिस्तान के राजनीतिक भविष्य, पाकिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता और बलूच लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या स्वतंत्रता समर्थक समूह अपनी घोषणा को वास्तविक राजनीतिक और प्रशासनिक नियंत्रण में बदल पाते हैं और क्या भविष्य में किसी देश से उन्हें औपचारिक राजनयिक मान्यता मिलती है।
