नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि उसकी इकाई, भीम सर्विसेज और ट्रांसयूनियन सिबिल के बीच एक नया करार हुआ है, जिसके बाद अब भीम ऐप के उपयोगकर्ता अपने क्रेडिट स्कोर की जांच ऐप के भीतर ही कर सकेंगे। इस नए एकीकरण के माध्यम से यूजर्स सीधे भीम ऐप पर अपना सिबिल स्कोर और क्रेडिट रिपोर्ट देख सकते हैं, जिससे उन्हें किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी और वे ऐप का उपयोग करते हुए ही अपनी क्रेडिट स्थिति पर आसानी से नजर रख सकेंगे। एनपीसीआई ने स्पष्ट किया है कि क्रेडिट डेटा तक पहुंच पूरी तरह से सहमति-आधारित मॉडल द्वारा नियंत्रित होगी, जिसका अर्थ है कि यह जानकारी केवल यूजर की स्पष्ट स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही साझा की जाएगी।
यह नई सुविधा भीम ऐप के वर्जन 4.0.19 और उसके बाद के वर्जनों पर उपलब्ध है, और इसे जोड़ने का मुख्य उद्देश्य ऐप की उपयोगिता को केवल रोजमर्रा के भुगतानों तक सीमित न रखकर इसे व्यापक वित्तीय जागरूकता के एक मंच के रूप में विस्तारित करना है। ट्रांसयूनियन सिबिल के एमडी और सीईओ भावेश जैन ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जैसे-जैसे भारत क्रेडिट के लिए लेन-देन आधारित दृष्टिकोण से निकलकर एक अधिक योजनाबद्ध दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहा है, यह कदम उपभोक्ता जागरूकता की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रगति है। एनपीसीआई भीम सर्विसेज लिमिटेड की एमडी और सीईओ ललिता नटराज ने भी इस साझेदारी पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग ऐप के मूल सिद्धांत यानी सरलता और उपयोगकर्ता नियंत्रण को क्रेडिट क्षेत्र में भी आगे बढ़ाने का काम करेगा।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले मार्च महीने में, एनपीसीआई भीम सर्विसेज लिमिटेड ने ऐप पर यूपीआई भुगतान के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की सुविधा शुरू की थी, जिससे उपयोगकर्ता फिंगरप्रिंट या चेहरे की पहचान के जरिए 5,000 रुपए तक के लेनदेन को मंजूरी दे सकते हैं। एनपीसीआई भीम सर्विसेज लिमिटेड द्वारा विकसित भारत का अपना स्वदेशी यूपीआई भुगतान ऐप, भीम, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से अधिक भारतीय भाषाओं में सेवाएं प्रदान करता है और इसमें खर्चों को विभाजित करने, फैमिली मोड और खर्च विश्लेषण जैसी उपयोगी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं। हाल ही में भारत के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) ने अपने संचालन के 10 गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए हैं और वैश्विक स्तर पर रियल टाइम लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
