संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था के इस वर्ष 6.4 प्रतिशत और 2027 में 6.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) द्वारा कल जारी की गई ‘इकोनॉमिक एंड सोशल सर्वे ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक 2026’ नामक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में 2025 में 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो 2024 में 5.2 प्रतिशत थी और इस वृद्धि के पीछे मुख्य कारण भारत का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत की विकास दर बढ़कर 7.4 प्रतिशत हो गई थी, जिसे मजबूत खपत, विशेष रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था से काफी सहारा मिला। इसके अतिरिक्त, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कटौती और अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले संभावित शुल्कों के मद्देनजर निर्यात को समय से पहले बढ़ाने की रणनीति ने भी इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने भारत के आर्थिक भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं और देश में मुद्रास्फीति के मोर्चे पर भी राहत की उम्मीद जताई है, जिसके इस वर्ष 4.4 प्रतिशत और 2027 में 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट में इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (IRENA) के अनुमानों का भी उल्लेख किया गया है, जिसके अनुसार विश्व स्तर पर लगभग 1.66 करोड़ हरित नौकरियां (ग्रीन जॉब्स) उपलब्ध हैं। वर्ष 2012 से 2024 के बीच प्रतिवर्ष लगभग 8 लाख नई नौकरियां सृजित हुई हैं, जो कि 7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाती है। रिपोर्ट में विशेष रूप से भारत की उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना की सराहना की गई है। इसमें कहा गया है कि यह योजना दिखाती है कि कैसे व्यापक आर्थिक नीतियां सोलर फोटोवोल्टिक, बैटरी और ग्रीन हाइड्रोजन के घरेलू विनिर्माण के लिए प्रोत्साहन देकर हरित औद्योगिक विकास को बढ़ावा दे सकती हैं। इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम हो रही है, बल्कि नए औद्योगिक लाभार्थी भी तैयार हो रहे हैं जिनकी इस बदलाव को बनाए रखने में गहरी रुचि है।
