भारतीय सिनेमाघरों में एक खास तरह की ऊर्जा लौट आई है – वह ‘इलेक्ट्रिसिटी’ जो केवल एक खचाखच भरे हॉल में नायक की स्लो-मोशन एंट्री पर बजने वाली सीटियों और तालियों की गड़गड़ाहट से पैदा होती है। पिछले कुछ समय से ओटीटी के बढ़ते प्रभाव और बड़े बजट की फिल्मों की असफलता के कारण यह चमक फीकी पड़ती दिख रही थी, लेकिन दिसंबर 2025 में रिलीज हुई ‘धुरंधर’ और अब इसके सीक्वल ‘धुरंधर: द रिवेंज’ ने पासा पलट दिया है। इस जासूसी थ्रिलर ने न केवल बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, बल्कि दुनिया भर में लगभग 155 मिलियन डॉलर (करीब ₹1300 करोड़) की कमाई कर हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में अपनी जगह बना ली है।
फिल्म व्यापार विश्लेषक तरण आदर्श का कहना है कि यह सीक्वल इतिहास रच रहा है और बॉक्स ऑफिस की परिभाषा बदल रहा है। ‘धुरंधर’ की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके दूसरे भाग के लिए एडवांस में ही 15 लाख से अधिक टिकट बिक गए थे। लगभग चार घंटे लंबी यह फिल्म अपने पहले भाग की तुलना में अधिक भव्य और आक्रामक है। फिल्म की कहानी आदित्य धर के निर्देशन में रणवीर सिंह द्वारा निभाए गए एक भारतीय जासूस के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कराची के राजनीतिक और आपराधिक अंडरवर्ल्ड के खतरनाक मिशन पर है। फिल्म में आर. माधवन, अर्जुन रामपाल, संजय दत्त और सारा अर्जुन जैसे सितारों ने अपनी मौजूदगी से इसे और भी प्रभावशाली बना दिया है।
जहाँ एक तरफ आम दर्शक इसे “पैसा वसूल” मनोरंजन बता रहे हैं और अल्लू अर्जुन, प्रीति जिंटा व अनुपम खेर जैसे दिग्गजों ने इसकी तारीफ की है, वहीं दूसरी ओर फिल्म की राजनीति और ‘मस्कुलर नेशनलिज्म’ (कठोर राष्ट्रवाद) को लेकर बहस भी छिड़ गई है। कुछ समीक्षकों का मानना है कि फिल्म जटिल भू-राजनीति को केवल काले और सफेद चश्मे से दिखाती है, जबकि सोशल मीडिया पर भी इसकी ‘प्रोपेगेंडा’ इमेज को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं। इसके बावजूद, रणवीर सिंह के अभिनय और शाश्वत सचदेव के बैकग्राउंड स्कोर की हर तरफ सराहना हो रही है। ‘धुरंधर’ का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा; फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों जैसे वैश्विक नेताओं ने भी इस फिल्म का जिक्र किया है। तरण आदर्श इसकी तुलना 1975 की क्लासिक ‘शोले’ से करते हुए कहते हैं कि यह फिल्म बड़े पर्दे के बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर युग की असली वापसी है।
