भारत सरकार ने उर्वरक संयंत्रों के लिए गैस आवंटन में 5 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है, जिससे अब यह उनके छह महीने के औसत उपभोग के लगभग 95 प्रतिशत तक पहुँच गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, घरेलू मोर्चे पर भी पीएनजी (PNG) के बुनियादी ढांचे में तेजी आई है और मार्च से अब तक लगभग 4.15 लाख नए कनेक्शन गैस से जुड़ चुके हैं, जबकि 4.55 लाख अतिरिक्त ग्राहकों ने पंजीकरण कराया है। इस बदलाव का सकारात्मक प्रभाव यह रहा है कि अब तक 26,000 से अधिक उपभोक्ताओं ने आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं।
एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ देशव्यापी प्रवर्तन अभियान भी छेड़ दिया है। इसी क्रम में शुक्रवार को देश भर में 3,400 से अधिक छापेमारी की गई, जिसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने नियमों के उल्लंघन पर 214 वितरकों पर जुर्माना लगाया और 55 अन्य की सेवाओं को निलंबित कर दिया। राहत की बात यह है कि छात्रों और प्रवासी मजदूरों जैसे संवेदनशील समूहों के लिए 5 किलोग्राम वाले फ्री-ट्रेड एलपीजी सिलेंडरों की बिक्री में भारी उछाल आया है, जहाँ 23 मार्च के बाद से अब तक 12 लाख से अधिक ऐसे सिलेंडर बेचे जा चुके हैं।
ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ सरकार समुद्री मार्गों पर भारतीय हितों की सुरक्षा को लेकर भी मुस्तैद है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने पश्चिम एशिया क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। मंत्रालय ने पुष्टि की है कि पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज के साथ कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है और सभी नाविक सुरक्षित हैं। विशेष रूप से, भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर ‘जग विक्रम’ लगभग 20,400 मीट्रिक टन कार्गो और 24 चालक दल के सदस्यों के साथ सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुका है और इसके 15 अप्रैल तक मुंबई पहुंचने की उम्मीद है।
