भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने आज अपने परिचालन के गौरवशाली 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। पिछले एक दशक में यूपीआई एक पायलट प्रोजेक्ट से विकसित होकर भारतीय भुगतान प्रणाली की रीढ़ बन चुका है, जिसने देश को नकदी-प्रधान अर्थव्यवस्था से रीयल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली की ओर सफलतापूर्वक अग्रसर किया है। आकाशवाणी संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2016 में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा लॉन्च किए गए इस सिस्टम ने भारत में धन के हस्तांतरण की प्रक्रिया को मौलिक रूप से सरल बना दिया है।
यूपीआई के नेटवर्क में जबरदस्त विस्तार देखा गया है, जहाँ 2021 में इससे 216 बैंक जुड़े थे, वहीं जनवरी 2026 तक यह संख्या बढ़कर 691 हो गई है। इस एकीकृत बुनियादी ढांचे ने उपयोगकर्ताओं को अपने बैंक या प्लेटफॉर्म की परवाह किए बिना सहजता से लेनदेन करने में सक्षम बनाया है। वित्त मंत्रालय ने इस उपलब्धि पर गौर करते हुए बताया कि वैश्विक रीयल-टाइम भुगतान प्रणाली के कुल लेनदेन की मात्रा में यूपीआई की हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं ने भी यूपीआई के बड़े पैमाने, इसकी दक्षता और समावेशी स्वरूप की सराहना की है।
आज यूपीआई का प्रभाव केवल राष्ट्रीय सीमाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर सहित कई देशों की भुगतान प्रणालियों के साथ जुड़ चुका है। यह स्पष्ट है कि यूपीआई अब महज एक भुगतान प्रणाली नहीं रह गई है, बल्कि यह एक जन-मंच बन चुका है जिसने वित्तीय लेनदेन को तेज, सरल, पारदर्शी और समावेशी बनाकर आम नागरिक के जीवन को सुगम बनाया है।
