दुनिया में इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर एक नई क्रांति चल रही है। अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देश तेजी से AI तकनीक को अपनाकर अपनी अर्थव्यवस्था और कंपनियों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा रहे हैं। लेकिन इसी बीच भारत को लेकर कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स चिंता जता रही हैं। कुछ विदेशी मीडिया संस्थानों का कहना है कि भारत AI की इस बड़ी दौड़ में पीछे छूट गया है और इसका असर अब भारतीय शेयर बाजार और IT सेक्टर पर साफ दिखाई देने लगा है।
ब्लूमबर्ग और जापान टाइम्स जैसी रिपोर्ट्स में कहा गया कि भारत AI की ट्रेन मिस कर चुका है। इन रिपोर्ट्स के अनुसार भारत की कंपनियां समय रहते AI तकनीक को समझ नहीं पाईं और इसका असर निवेश, मार्केट वैल्यू और कंपनियों की ग्रोथ पर दिखाई दे रहा है।
भारतीय शेयर बाजार में 2026 की शुरुआत से लगातार गिरावट देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में जनवरी के मुकाबले करीब 10 हजार अंकों की गिरावट दर्ज हुई। विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़े स्तर पर पैसा निकालना शुरू कर दिया। केवल मई महीने में ही विदेशी निवेशकों ने लगभग 27 हजार करोड़ रुपये निकाल लिए। पूरे साल में यह आंकड़ा 2.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि घरेलू निवेशकों ने बाजार को संभालने की कोशिश की, लेकिन बाजार पर दबाव लगातार बना रहा।
शुरुआत में माना गया कि यह गिरावट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट और तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से हो रही है। लेकिन सवाल यह उठा कि अगर यही कारण था तो दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों के बाजार क्यों मजबूत बने रहे। ये देश भी तेल आयात करते हैं, फिर भी वहां के बाजार तेजी से ऊपर गए। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह AI में उनका भारी निवेश है।
दक्षिण कोरिया की बड़ी कंपनियां जैसे सैमसंग और ताइवान की सेमीकंडक्टर कंपनियों ने AI तकनीक को तेजी से अपनाया। AI के लिए जरूरी चिप्स और डेटा सेंटर पर अरबों डॉलर का निवेश किया गया। इसका असर उनकी कंपनियों की वैल्यू पर दिखाई दिया और उनके शेयर बाजार तेजी से ऊपर चले गए।
वहीं भारत की कई बड़ी IT कंपनियां लंबे समय तक AI को गंभीरता से नहीं ले पाईं। भारत का IT सेक्टर वर्षों से दुनिया को सर्विस देने के मॉडल पर काम करता रहा। लेकिन AI आने के बाद वही काम अब मशीनें और AI मॉडल कुछ सेकंड में करने लगे। इससे भारतीय IT सेक्टर पर दबाव बढ़ गया।
इस चर्चा में सबसे ज्यादा नाम नारायण मूर्ति और इंफोसिस का लिया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार साल 2017 में AI और OpenAI में निवेश को लेकर कंपनी के अंदर चर्चा हुई थी। उस समय AI को लेकर काफी संदेह जताया गया और इसे ओवरहाइप कहा गया। बाद में OpenAI दुनिया की सबसे बड़ी AI कंपनियों में शामिल हो गई और उसकी वैल्यू 800 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई।
दूसरी तरफ अमेरिका की कंपनियों ने AI को तुरंत अपनाया। OpenAI के ChatGPT आने के बाद पूरी दुनिया बदल गई। पहले लोग जानकारी खोजने के लिए गूगल का इस्तेमाल करते थे, लेकिन AI ने सीधे सवालों के जवाब देना शुरू कर दिया। इसके बाद गूगल, अमेज़न, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों ने AI में भारी निवेश शुरू कर दिया।
AI की इस दौड़ में सबसे बड़ा फायदा NVIDIA को मिला। AI मॉडल बनाने के लिए जिन शक्तिशाली चिप्स की जरूरत थी, वे Nvidia बना रही थी। कंपनी की वैल्यू कई ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई। आज Nvidia दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण टेक कंपनियों में गिनी जाती है।
चीन ने भी AI को लेकर बहुत तेजी दिखाई। अमेरिका के प्रतिबंधों के बावजूद चीन ने अपने AI मॉडल और चिप इंडस्ट्री पर तेजी से काम किया। अलीबाबा, टेनसेंट और बाइटडांस जैसी कंपनियों ने AI में बड़े निवेश किए। चीन ने समझ लिया कि भविष्य की अर्थव्यवस्था तकनीक और AI पर ही टिकेगी।
भारत की स्थिति थोड़ी अलग रही। देश में AI को लेकर जागरूकता देर से आई। सरकार ने कई योजनाएं शुरू कीं और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर चर्चा तेज हुई, लेकिन तब तक दुनिया काफी आगे निकल चुकी थी। भारत अभी भी डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर निर्माण, AI मॉडल और हाई-एंड कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में संघर्ष कर रहा है।
हालांकि अब भारत में भी बदलाव की कोशिशें शुरू हो गई हैं। अदानी समूह ने डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश की घोषणा की है। IBM और भारत AI मिशन ने भी भारत में AI मार्केट को बढ़ाने की दिशा में योजनाएं बनाई हैं। प्रधानमंत्री स्तर पर भी सेमीकंडक्टर और AI को लेकर कई अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों पर काम हो रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत के पास अभी भी प्रतिभा की कमी नहीं है। भारतीय इंजीनियर और डेवलपर्स दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियों में काम कर रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती नई तकनीक को समय रहते स्वीकार करने की है। AI केवल इंटरनेट का अगला चरण नहीं है, बल्कि यह पूरी अर्थव्यवस्था और काम करने के तरीकों को बदलने वाली तकनीक बन चुकी है।
आज दुनिया का बाजार AI कंपनियों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। जो देश और कंपनियां AI को अपनाएंगी, वही आने वाले समय में सबसे आगे रहेंगी। भारत के लिए यह समय चेतावनी और अवसर दोनों का है। अगर देश तेजी से AI इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च और इनोवेशन पर काम करता है, तो अभी भी वापसी संभव है। लेकिन अगर यह बदलाव फिर देर से अपनाया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत के IT सेक्टर और अर्थव्यवस्था पर इसका असर और गहरा हो सकता है।
