केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को साफ कहा कि भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते से भारतीय किसानों के हितों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समझौते में सरकार ने कृषि क्षेत्र और किसानों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और किसी भी संवेदनशील कृषि उत्पाद को अमेरिकी आयात के लिए नहीं खोला गया है।
भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चौहान ने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत की प्रमुख फसलें, डेयरी सेक्टर और मसाले पूरी तरह सुरक्षित रहें। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत ऐसा कोई भी फैसला नहीं लिया गया है जिससे भारतीय किसानों को जोखिम हो। हाल ही में सामने आए आधिकारिक बयानों में भी कहा गया है कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और किसी भी संवेदनशील कृषि उत्पाद को समझौते के दायरे में शामिल नहीं किया गया है।
कृषि मंत्री ने कहा कि इस समझौते में सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटा अनाज, पोल्ट्री, डेयरी उत्पाद, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, काबुली चना, मूंग, तिलहन, एथनॉल और तंबाकू जैसे उत्पादों पर कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है। इसके अलावा दूध, दही, मक्खन, घी, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों का आयात भी भारत में अनुमति नहीं दी जाएगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत ने आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) कृषि उत्पादों के आयात को लेकर भी सख्त रुख बनाए रखा है। यह फैसला भारतीय खेती, मिट्टी और बीजों की गुणवत्ता को सुरक्षित रखने के लिए अहम माना जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस समझौते के तहत अमेरिका ने कई भारतीय उत्पादों पर शुल्क घटाकर करीब 18 प्रतिशत कर दिया है। इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा मिलने की संभावना है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ने कई भारतीय निर्यात उत्पादों पर पहले लगाए गए ऊंचे शुल्क में कटौती की है, जिससे भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा का बेहतर मौका मिलेगा।
सरकार का कहना है कि इस समझौते से भारतीय कृषि निर्यात को भी मजबूती मिलेगी। कई कृषि और खाद्य उत्पाद अब अमेरिकी बाजार में शून्य शुल्क पर पहुंच सकेंगे। इसमें चाय, मसाले, कॉफी, नारियल तेल और कई फल-सब्जियां शामिल हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
चौहान ने कहा कि अमेरिका को भारतीय बाजार में कृषि उत्पादों के लिए कोई विशेष रियायत नहीं दी गई है। हालांकि कुछ सीमित कृषि और खाद्य उत्पादों पर बाजार पहुंच दी गई है, लेकिन संवेदनशील सेक्टर जैसे दूध, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री और तंबाकू पूरी तरह सुरक्षित रखे गए हैं।
सरकार का दावा है कि यह समझौता संतुलित और दोनों देशों के लिए लाभकारी है। अधिकारियों के अनुसार इस डील से भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अब तक कई मुक्त व्यापार समझौते किए हैं और आगे भी नए देशों के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि ऐसे समझौते भारत को वैश्विक व्यापार में मजबूत बनाएंगे और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि अंतरिम समझौते के सफल रहने पर अमेरिका कई उत्पादों पर लगाए गए शुल्क को पूरी तरह खत्म कर सकता है। इसमें जेनेरिक दवाएं, रत्न और हीरे तथा विमान के पुर्जे जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिससे भारत के उद्योग और निर्यात सेक्टर को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि यह समझौता किसानों की सुरक्षा और निर्यात विस्तार के बीच संतुलन बनाता है और भारतीय अर्थव्यवस्था को लंबे समय में मजबूती देगा।
