प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि देश इस समय “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर सवार होकर तेज़ी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां सरकार प्रक्रियाओं को सरल बनाने, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने और तकनीक आधारित सुशासन को विस्तार देने पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सुधारों का मूल्यांकन केवल नीतिगत घोषणाओं से नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर उनके प्रभाव और बेहतर क्रियान्वयन से किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री आज “टेक्नोलॉजी, रिफॉर्म्स एंड फाइनेंस फॉर विकसित भारत” विषय पर आयोजित पोस्ट बजट वेबिनार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश को विकास की गति बनाए रखने के लिए नीति निर्माण के साथ-साथ डिलीवरी में उत्कृष्टता सुनिश्चित करनी होगी।
उन्होंने पारदर्शिता, गति और जवाबदेही बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों के व्यापक उपयोग पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है, क्योंकि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ही देश की दीर्घकालिक प्रगति की आधारशिला बनता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार ने यह सोच-समझकर निर्णय लिया कि भारत का विकास तभी संभव है जब हाईवे, रेलवे, बंदरगाह, डिजिटल नेटवर्क और ऊर्जा प्रणालियों जैसी मजबूत परिसंपत्तियां तैयार की जाएं। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं आने वाले कई दशकों तक उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
उन्होंने बताया कि इसी सोच के तहत सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (Public Capital Expenditure) को लगातार बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि करीब 11 वर्ष पहले बजट में पूंजीगत व्यय के लिए केवल दो लाख करोड़ रुपये का प्रावधान था, जबकि हालिया केंद्रीय बजट में यह बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अक्सर बजट का मूल्यांकन अलग-अलग मानकों पर किया जाता है। कभी चर्चा शेयर बाजार की चाल पर केंद्रित रहती है तो कभी आयकर प्रस्तावों पर। लेकिन वास्तविकता यह है कि राष्ट्रीय बजट कोई अल्पकालिक व्यापारिक दस्तावेज नहीं बल्कि देश के भविष्य की नीति रूपरेखा होता है। इसलिए इसकी सफलता को ठोस और दीर्घकालिक परिणामों के आधार पर आंका जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि पोस्ट बजट वेबिनार केवल विचारों के आदान-प्रदान का मंच बनकर सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे गहन मंथन का माध्यम बनना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब उद्योग जगत, शिक्षाविद, विश्लेषक और नीति निर्माता मिलकर सोचते हैं, तब योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर होता है और परिणाम अधिक सटीक एवं प्रभावी मिलते हैं।
