प्रधानमंत्री मोदी की पांच दिवसीय विदेश यात्रा भारत के लिए बड़े आर्थिक अवसर लेकर आई है। इस दौरे के दौरान भारत को करीब 40 अरब डॉलर के नए निवेश की प्रतिबद्धताएं प्राप्त हुई हैं। यह निवेश तकनीक, आधारभूत संरचना, हरित ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अर्धचालक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रस्तावित है, जिससे आने वाले समय में देश की आर्थिक मजबूती और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने 50 से अधिक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इनमें वे कंपनियां शामिल थीं जो अर्धचालक, लॉजिस्टिक्स, तकनीक, हरित हाइड्रोजन और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। इन कंपनियों का संयुक्त बाजार मूल्य लगभग 2.7 से 3 ट्रिलियन डॉलर के बीच बताया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इन चर्चाओं और निवेश प्रस्तावों का कुल अनुमानित मूल्य करीब 40 अरब डॉलर है।
संयुक्त अरब अमीरात ने भारत में 5 अरब डॉलर के नए निवेश की घोषणा की है। इसके अलावा कई वैश्विक कंपनियों ने भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने और नई परियोजनाओं में निवेश करने का भरोसा जताया है। बताया गया है कि इन कंपनियों की भारत में पहले से मजबूत मौजूदगी है और उनका कुल निवेश लगभग 180 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा में संयुक्त अरब अमीरात, Netherlands, Sweden, Norway और Italy शामिल रहे। यात्रा के दौरान विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक सहयोग को नई दिशा दी गई। नीदरलैंड के साथ व्यापार, रक्षा, अर्धचालक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हरित हाइड्रोजन को लेकर रणनीतिक साझेदारी का रोडमैप जारी किया गया। वहीं स्वीडन के साथ द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति बनी।
प्रधानमंत्री मोदी ने नॉर्वे में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी भाग लिया, जहां क्षेत्रीय सहयोग और निवेश को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। इसके अलावा इटली के साथ संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उठाया गया, जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत को वैश्विक निवेश केंद्र के रूप में और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में अहम साबित होगा। विदेशी कंपनियों का बढ़ता विश्वास यह संकेत देता है कि भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, विशाल घरेलू बाजार और निवेश अनुकूल नीतियां दुनिया की बड़ी कंपनियों को लगातार आकर्षित कर रही हैं।
