प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर कई चिंताओं और संसाधनों के हथियार बनने के बावजूद आज पूरी दुनिया भारत को विकास के एक उज्ज्वल स्थान (ब्राइट स्पॉट) के रूप में देख रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अपनी विकास गति को बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठा रहा है और सुधार उनकी सरकार की सर्वोच्च प्रतिबद्धता है।
1. ‘उत्पादन से जुड़ी सजा’ से ‘पीएलआई’ तक का सफर
प्रधानमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले की सरकारों का मॉडल ‘प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट’ (उत्पादन से जुड़ी सजा) का था, जिसे बदलकर उनकी सरकार ने ‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव’ (पीएलआई – PLI) यानी उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन का मॉडल अपनाया है।
- कमी बनाम अवसर: पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों की नीति लोगों को अभाव में रखने की थी ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी सरकार के सामने हाथ फैलाएं।
- लाइसेंस राज पर प्रहार: उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों का ‘लाइसेंस राज’ बेरोजगारी बढ़ाने का जरिया था, जबकि उनकी सरकार का पीएलआई मॉडल देश में नए अवसर पैदा कर रहा है।
- सरकार केवल नियमों में बदलाव नहीं कर रही है, बल्कि विनियमन की पूरी नीति को ही बदल रही है।
2. साझा भविष्य और वसुधैव कुटुंबकम की भावना
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हमेशा ‘साझा भविष्य’ की भावना में विश्वास किया है। यही वजह है कि भारत की जी20 (G20) अध्यक्षता के दौरान इसका मुख्य मार्गदर्शक सिद्धांत “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” (One Earth, One Family, One Future) रखा गया था।
- वैश्विक जुड़ाव: पीएम ने कहा कि पिछले कुछ सालों में दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और इन अनुभवों ने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि हर देश का भविष्य दूसरे देशों से जुड़ा हुआ है।
- साझा भविष्य की भावना और उससे जुड़ी जिम्मेदारी की यह भावना 21वीं सदी में दुनिया के सामने आने वाली कई चुनौतियों का पुख्ता समाधान प्रदान करती है।
