.अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर साझा किए गए एक विशेष लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा और शिक्षण प्रक्रिया के व्यापक दृष्टिकोण को रेखांकित किया है। पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षण केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक बेहद रचनात्मक कार्य है। शिक्षक का सबसे महत्वपूर्ण योगदान विद्यार्थियों के भीतर छिपी उन संभावनाओं को पहचानना और तराशना है, जिन्हें वे स्वयं नहीं देख पाते।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किए गए लेख के प्रमुख बिंदु:
जीवन के लिए सीखना: लैटिन कहावत ‘Non scholae sed vitae discimus’ (हम स्कूल के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए सीखते हैं) का हवाला देते हुए पीएम ने शिक्षा को केवल परीक्षाओं तक सीमित न रखकर आजीवन सीखने की प्रक्रिया बनाने पर जोर दिया।
पूर्ण साक्षरता की उपलब्धि: उल्लास/साक्षरता कार्यक्रमों के तहत देश के नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पूर्ण साक्षर घोषित किया जा चुका है।
विद्यांजलि पोर्टल का प्रभाव: विद्यांजलि पोर्टल के माध्यम से 8.75 लाख से अधिक सरकारी स्कूल स्वयंसेवकों से जुड़े हैं, जो गणित, नृत्य, कला और हस्तशिल्प जैसी विधाओं का ज्ञान साझा कर रहे हैं।
हर विषय राष्ट्र निर्माण का माध्यम: पारंपरिक अकादमिक विषयों के अलावा संगीत, खेल, शारीरिक शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण (ITI) को भी बराबरी का महत्व देने की आवश्यकता है।
ऑरेंज इकोनॉमी और करियर: संगीत और सांस्कृतिक क्षेत्र ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ के तहत युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करेंगे, जबकि खेल और तकनीकी प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में सीधे योगदान दे रहे हैं।
