महिला आरक्षण: लोकतंत्र की मजबूती
आज से शुरू हुए बजट सत्र के विस्तारित विशेष सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर करीब 3 बजे लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर अपना संबोधन देंगे। सदन में मत विभाजन के बाद तीन महत्वपूर्ण विधेयकों—संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026—को विचार के लिए स्वीकार कर लिया गया है।
इससे पहले प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में जोर देकर कहा कि भारतीय लोकतंत्र को अधिक जीवंत और सहभागी बनाने के लिए विधायी निकायों में महिलाओं को आरक्षण देना समय की मांग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक कदम में किसी भी तरह की देरी दुर्भाग्यपूर्ण होगी। प्रधानमंत्री ने अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले दशकों में भी पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा महिलाओं को लोकतांत्रिक संस्थानों में उनका उचित स्थान दिलाने के कई प्रयास किए गए, समितियां बनीं और मसौदे तैयार हुए, लेकिन वे कभी कानून का रूप नहीं ले सके। उन्होंने रेखांकित किया कि देश की लगभग आधी आबादी महिलाएं हैं और राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान असीम और अमूल्य है, जिसे अब विधायी शक्ति के माध्यम से नई पहचान मिलना आवश्यक है।
