केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में सीपीजीआरएएमएस के एआई-सक्षम वॉयस चैटबॉट ‘समाधान दीदी’ का शुभारंभ किया। प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) द्वारा भाषिणी के सहयोग से विकसित यह चैटबॉट देश की लोक शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक सरल, सुलभ और बहुभाषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ‘समाधान दीदी’ की शुरुआत लोक शिकायत निवारण तंत्र के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नागरिक-केंद्रित शासन को लगातार मजबूत किया जा रहा है और यह पहल उसी सोच का विस्तार है।
इस नई एआई आधारित प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब नागरिक अपनी शिकायत अपनी मातृभाषा में बोलकर दर्ज करा सकेंगे। शिकायतकर्ता को यह जानने की आवश्यकता नहीं होगी कि उसकी समस्या किस मंत्रालय या विभाग से संबंधित है। चैटबॉट स्वयं शिकायत को समझेगा, आवश्यक जानकारी प्राप्त करेगा और संबंधित मंत्रालय, विभाग तथा श्रेणी की पहचान कर शिकायत को सही स्थान पर दर्ज कर देगा।
डॉ. सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित यह तकनीक शिकायत निवारण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और प्रभावी बनाएगी। इससे शिकायतों के समाधान की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा तथा नागरिकों की भागीदारी भी बढ़ेगी।
उन्होंने राज्यों और अन्य संस्थाओं से भी आग्रह किया कि वे अपने शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म में ‘समाधान दीदी’ जैसे एआई-संचालित वॉयस टूल्स को शामिल करें। उनका कहना था कि यह सरकार के “संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक सेवाओं की आसान पहुंच सुनिश्चित करना है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में जहां सीपीजीआरएएमएस पर प्रतिवर्ष लगभग दो लाख शिकायतें दर्ज होती थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 25 लाख से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि शिकायत निवारण की 95 प्रतिशत से अधिक दर सरकार के प्रति नागरिकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
‘समाधान दीदी’ को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं के साथ-साथ भोजपुरी, गारो, खासी, मिजो और बोधी जैसी क्षेत्रीय एवं स्वदेशी भाषाओं से भी जोड़ा जाएगा। इससे देश के विभिन्न भाषाई समुदायों के लिए शिकायत दर्ज करना और अधिक आसान हो जाएगा।
यह प्रणाली भाषिणी की उन्नत भाषा तकनीक और सीपीजीआरएएमएस के शिकायत वर्गीकरण मॉडल के साथ एकीकृत है। इसे सुरक्षित सरकारी डिजिटल ढांचे के भीतर विकसित किया गया है, जिससे नागरिकों के डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीपीजीआरएएमएस आज नागरिक-केंद्रित सुशासन का एक वैश्विक उदाहरण बनकर उभरा है और ‘समाधान दीदी’ जैसी पहलें यह साबित करती हैं कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी बनाया जा सकता है।
