संसद ने सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। राज्यसभा में चर्चा के बाद विधेयक को लोकसभा को वापस भेज दिया गया, जबकि लोकसभा इसे सोमवार को ही पारित कर चुकी थी। इस संशोधन के तहत सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है। इस प्रकार मुख्य न्यायाधीश सहित अब सर्वोच्च न्यायालय में कुल 38 न्यायाधीश होंगे।
इस वर्ष मई में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए अध्यादेश जारी किया था, जिसे अब संसद की मंजूरी मिल गई है।
राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि केंद्र सरकार “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में सुधार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और यह विधेयक उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से सर्वोच्च न्यायालय की कार्यक्षमता में सुधार होगा और लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण में सहायता मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि न्यायपालिका पर लगातार बढ़ते कार्यभार, संवैधानिक और कानूनी मामलों की जटिलता तथा बदलती आवश्यकताओं को देखते हुए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना समय की मांग है। उन्होंने बताया कि सरकार न्यायालयों में मामलों के त्वरित निपटारे के लिए कई सुधारात्मक कदम उठा रही है।
चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए अध्यादेश लाने की आवश्यकता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में लगभग 95 हजार मामले लंबित हैं।
भारतीय जनता पार्टी की सांसद संगीता यादव ने विधेयक को ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य आम नागरिकों को सुलभ और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि अनेक मामले एक दशक से अधिक समय से लंबित हैं और यह संशोधन न्याय व्यवस्था को मजबूत करेगा।
तृणमूल कांग्रेस की डॉ. मेनका गुरुस्वामी ने उच्च न्यायालयों में लगभग 30 प्रतिशत न्यायाधीशों के पद रिक्त होने का मुद्दा उठाया। द्रविड़ मुनेत्र कषगम के आर. गिरिराजन ने कहा कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों का बोझ कम होगा। बीजू जनता दल के डॉ. सस्मित पात्रा ने भी विधेयक का समर्थन करते हुए सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
वाईएसआर कांग्रेस के एस. निरंजन रेड्डी ने कहा कि प्रति न्यायाधीश मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम के आई. एस. इनबदुरई ने विधेयक का समर्थन करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय में रिक्त पदों को शीघ्र भरने की मांग की। शिवसेना की डॉ. ज्योति एन. वाघमारे ने कहा कि यह कानून लोगों में न्यायपालिका के प्रति विश्वास बढ़ाएगा और शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
चर्चा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राजेंद्र जैन, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, शिवसेना के मिलिंद देवड़ा, तेलुगु देशम पार्टी के विजय चिंतकायला तथा झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी सहित कई अन्य सदस्यों ने भी भाग लिया।
विधेयक पर चर्चा पूरी होने के बाद राज्यसभा ने इसे लोकसभा को वापस भेज दिया। इसके पश्चात सदन में विशेष उल्लेख के तहत विभिन्न जनहित के मुद्दे उठाए गए और कार्यवाही पूरी होने पर सदन को अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
