पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच लगभग 21 घंटों तक चली ऐतिहासिक वार्ता बिना किसी ठोस समझौते के समाप्त हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस चर्चा को काफी गंभीर और विस्तृत बताया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यह बातचीत किसी नतीजे तक नहीं पहुँच सकी। वेंस के अनुसार, इस गतिरोध का मुख्य कारण वाशिंगटन की वह मांग है जिसमें ईरान से एक स्पष्ट और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता मांगी गई है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और न ही ऐसी क्षमताएं बनाएगा जिससे भविष्य में तेजी से परमाणु हथियार तैयार किए जा सकें। हालांकि अमेरिकी पक्ष ने अपनी रणनीति को लचीला और सद्भावनापूर्ण बताया, लेकिन ईरान ने प्रस्तावित शर्तों को स्वीकार नहीं किया। अब वाशिंगटन ने अपना अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव ईरान के समक्ष रख दिया है और अमेरिका फिलहाल तेहरान के जवाब का इंतजार कर रहा है।
दूसरी तरफ, ईरान सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के माध्यम से जानकारी दी है कि कुछ अनसुलझे मतभेदों के बावजूद वे संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। दशकों बाद दोनों देशों के बीच हुए इस उच्चतम स्तर के सीधे संवाद को पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और एक व्यवस्थित समझ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था। इस बैठक में युद्धविराम के प्रयासों, अमेरिका द्वारा रोकी गई ईरानी संपत्तियों की रिहाई और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी चर्चा की गई। वार्ता के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख काफी कड़ा रहा। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ईरान के साथ कोई समझौता हो या न हो, इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने दावा किया कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में अमेरिकी अभियान जारी हैं और अमेरिका पहले ही अपनी जीत सुनिश्चित कर चुका है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर ने किया। वहीं, ईरानी दल की अगुवाई वहां की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बकीर कलीबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी और सुरक्षा परिषद के उप प्रमुख अली बघेरी-कानी ने की। इसी बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो बयान जारी कर कहा कि ईरान के खिलाफ उनका अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि इजरायल ने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को विफल करते हुए ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। नेतन्याहू के अनुसार, ईरान परमाणु हथियार प्राप्त करने और रोजाना सैकड़ों मिसाइलें बनाने की क्षमता विकसित करने के बेहद करीब था, जिसे रोकने के लिए इजरायल ने यह सैन्य अभियान चलाया था।
