पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित करने के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के बीच इस्लामाबाद में जल्द ही वार्ता शुरू होने वाली है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक सरकारी विमान प्रतिनिधिमंडल को लेकर इस्लामाबाद पहुंच चुका है। वाशिंगटन के इस शांति प्रयासों का नेतृत्व उपराष्ट्रपति वेंस के साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जेयर्ड कुशनर कर रहे हैं।
पाकिस्तान रवाना होने से पहले श्री वेंस ने कहा कि वह इन वार्ताओं को लेकर आशान्वित हैं और उन्हें सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ईरानी पक्ष नेक नीयती के साथ बातचीत करने को तैयार है, तो अमेरिका निश्चित रूप से मदद का हाथ बढ़ाने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि ईरान ने “खेल” खेलने की कोशिश की, तो अमेरिकी टीम उतनी ग्रहणशील नहीं होगी।
दूसरी ओर, ईरान का प्रतिनिधित्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ कर रहे हैं। श्री गालिबाफ ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि दोनों पक्षों के बीच पहले से सहमत दो उपायों को अभी लागू किया जाना बाकी है—लेबनान में युद्धविराम और ईरान की रुकी हुई संपत्तियों की रिहाई। उन्होंने जोर देकर कहा कि औपचारिक बातचीत शुरू होने से पहले इन दोनों शर्तों को पूरा किया जाना चाहिए।
वार्ता के मुख्य बिंदु:
- ईरान का परमाणु संवर्धन कार्यक्रम।
- बैलिस्टिक मिसाइल विकास।
- रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव।
यह ऐतिहासिक वार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित दो सप्ताह के युद्धविराम के बीच हो रही है। ईरान अमेरिका द्वारा प्रस्तावित सीमित युद्धविराम के ढांचे से परे जाकर शत्रुता के स्थायी खात्मे की गारंटी भी मांग रहा है। इस वार्ता के संभावित परिणामों और चुनौतियों पर अधिक जानकारी के लिए हमने पूर्व राजनयिक अशोक सज्जनहार से विशेष चर्चा की।
