वीर बाल दिवस के अवसर पर शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश के 20 प्रतिभाशाली बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार 5 से 18 वर्ष की आयु के उन बच्चों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने साहस, खेल, पर्यावरण संरक्षण, विज्ञान एवं नवाचार, समाज सेवा, कला और संस्कृति जैसे विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान देकर देश का मान बढ़ाया है।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने सभी पुरस्कार विजेता बच्चों को बधाई देते हुए कहा कि उनके कार्यों ने न केवल उनके परिवार बल्कि समाज और पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि यह देखकर प्रसन्नता होती है कि भारत के बच्चे अपनी प्रतिभा, साहस और संवेदनशीलता के बल पर निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।
राष्ट्रपति ने बताया कि वर्ष 2022 से 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जा रहा है, जिसका संबंध इतिहास के एक अत्यंत प्रेरक अध्याय से जुड़ा है। उन्होंने सिख पंथ के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके चार साहिबजादों के बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि लगभग 320 वर्ष पूर्व सत्य और न्याय की रक्षा के लिए उन्होंने अद्वितीय साहस का परिचय दिया।
उन्होंने विशेष रूप से नौ वर्ष के बाबा जोरावर सिंह और सात वर्ष के बाबा फतेह सिंह की वीरता का उल्लेख किया, जिन्हें जीवित दीवार में चिनवा दिया गया था। राष्ट्रपति ने कहा कि उन वीर बालकों का बलिदान आज भी देश-विदेश में श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण किया जाता है। वीर बाल दिवस शौर्य के साथ-साथ देशप्रेम और राष्ट्रीय एकता का उत्सव भी है।
राष्ट्रपति ने महान क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह की जयंती पर उन्हें सादर नमन करते हुए कहा कि जिन देशों के बच्चे उच्च आदर्शों और देशभक्ति से ओत-प्रोत होते हैं, उनका भविष्य सुरक्षित रहता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के माध्यम से बच्चों को प्रेरित किया जा रहा है, ताकि अन्य बच्चे भी उनसे सीख लेकर आगे बढ़ें।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष सम्मानित बच्चों में सबसे कम उम्र की सात वर्षीय वाका लक्ष्मी प्राज्ञिका भी शामिल हैं, जो यह दर्शाता है कि प्रतिभा की कोई उम्र नहीं होती। राष्ट्रपति ने अजय राज और मोहम्मद सिदान पी जैसे बच्चों की भी सराहना की, जिन्होंने अपनी बहादुरी और सूझबूझ से दूसरों की जान बचाई।
राष्ट्रपति भावुक होते हुए उन बच्चों को भी स्मरण किया, जिन्होंने दूसरों की जान बचाते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने नौ वर्षीय व्योमा प्रिया और 11 वर्षीय कमलेश कुमार का उल्लेख किया, जिनके माता-पिता ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। राष्ट्रपति ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
इसके अलावा, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा पर तैनात भारतीय सेना के जवानों तक दूध, पानी और लस्सी पहुंचाने वाले 10 वर्षीय शवण सिंह की भी राष्ट्रपति ने प्रशंसा की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये सभी बच्चे आगे भी समाज और देश के लिए प्रेरणास्रोत बनते रहेंगे।
समारोह में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
