नई दिल्ली: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आगामी गर्मियों के मौसम के दौरान हीटवेव (लू) की गंभीर स्थिति की संभावना को देखते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सतर्क रहने और अपनी तैयारियों को मजबूत करने का निर्देश दिया है। मंत्रालय की सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को एक विस्तृत पत्र भेजकर स्थिति की गंभीरता को रेखांकित किया है।
सामान्य से अधिक तापमान की संभावना भारतीय मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान का हवाला देते हुए, मंत्रालय ने सूचित किया है कि अप्रैल से जून 2026 के बीच देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक हीटवेव वाले दिन होने की आशंका है। इसमें मुख्य रूप से पूर्वी, मध्य और उत्तर-पश्चिमी भारत, साथ ही दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीप के क्षेत्र शामिल हैं। भीषण गर्मी के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में वृद्धि होने की संभावना है, जिसे देखते हुए मंत्रालय ने यह कदम उठाया है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष दिशा-निर्देश मंत्रालय ने हीटवेव से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए राज्यों को निम्नलिखित प्रमुख निर्देश दिए हैं:
- हीटस्ट्रोक प्रबंधन इकाइयां: सभी स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष ‘हीटस्ट्रोक प्रबंधन इकाइयों’ (Heatstroke Management Units) को पूरी तरह से चालू रखने और जरूरी दवाओं व उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।
- एम्बुलेंस सेवा: आपातकालीन स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए एम्बुलेंस सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखने और उनकी तैयारियों की जांच करने का निर्देश दिया गया है।
- सतर्कता और प्रसार: जनता को गर्मी से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने के लिए शुरुआती चेतावनियों (Early Warnings) का व्यापक और नियमित प्रसार सुनिश्चित किया जाए।
- रियल-टाइम रिपोर्टिंग: हीटस्ट्रोक से संबंधित मामलों की सटीक निगरानी के लिए एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (IHIP) पोर्टल पर दैनिक आधार पर रियल-टाइम रिपोर्टिंग करना अनिवार्य है, ताकि समय रहते सटीक निर्णय लिए जा सकें।
सक्रिय योजना का महत्व सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि भीषण गर्मी के स्वास्थ्य प्रभावों को कम करने और गर्मी से संबंधित बीमारियों या मौतों को रोकने के लिए ‘सक्रिय योजना’ (Proactive Planning) और समन्वित कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि राज्यों को स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि गर्मी के दौरान स्वास्थ्य ढांचे पर पड़ने वाले दबाव को नियंत्रित किया जा सके और आम नागरिकों को सुरक्षित रखा जा सके।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों से इन दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने का आग्रह किया है ताकि गर्मी के आगामी चुनौतीपूर्ण महीनों में स्थिति को प्रभावी ढंग से संभाला जा सके।
