देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने स्वास्थ्य सेवाओं में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए भारत का पहला पोर्टेबल बेडसाइड MRI सिस्टम शुरू किया है। यह अत्याधुनिक तकनीक विशेष रूप से गंभीर रूप से बीमार उन मरीजों के लिए एक वरदान साबित होगी जिनके लिए तेज और सुरक्षित ब्रेन इमेजिंग की आवश्यकता होती है। इस पोर्टेबल MRI मशीन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे सीधे मरीज के बिस्तर तक ले जाया जा सकता है, जिससे पारंपरिक MRI स्कैन की उस जटिल प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी जिसमें मरीज को विशेष इमेजिंग कक्ष तक ले जाना पड़ता था। अब नई प्रणाली के माध्यम से ICU, इमरजेंसी और न्यूरोसर्जरी वार्ड में ही स्कैनिंग की सुविधा प्राप्त होगी, जिससे गंभीर मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने के दौरान होने वाला जोखिम काफी कम हो जाएगा।
एम्स के सेंटर फॉर न्यूरोलॉजिकल कंडीशंस में इस उन्नत तकनीक का विधिवत उपयोग प्रारंभ हो चुका है, जहाँ डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम डॉ. शैलेश गायकवाड़ के नेतृत्व में मरीजों की सूक्ष्मता से जांच कर रही है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक स्ट्रोक, सिर की गंभीर चोट, निरंतर ICU मॉनिटरिंग, छोटे बच्चों के उपचार और सर्जरी के बाद की देखभाल जैसे मामलों में अत्यंत प्रभावशाली और कारगर सिद्ध हो रही है। अल्ट्रा-लो-फील्ड तकनीक पर आधारित यह पोर्टेबल MRI आपातकालीन स्थितियों में डॉक्टरों को त्वरित निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा, विशेष रूप से उन परिस्थितियों में जहाँ पारंपरिक इमेजिंग पद्धतियों का उपयोग करना कठिन या मरीज के लिए जानलेवा हो सकता है।
इस महत्वपूर्ण पहल को आवश्यक नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद ही लागू किया गया है, जिसमें Radiosurgery Global का भी सक्रिय सहयोग शामिल है। स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह नवाचार न केवल देशभर में ब्रेन इमेजिंग की पहुंच को सुगम बनाएगा, बल्कि पॉइंट-ऑफ-केयर न्यूरोडायग्नोस्टिक्स के क्षेत्र में भविष्य के शोध को भी एक नई और प्रभावी दिशा प्रदान करेगा। इस उपलब्धि को भारत के स्वास्थ्य तंत्र को वैश्विक मानकों के अनुरूप अधिक सशक्त और आधुनिक बनाने की दिशा में एक मिल का पत्थर माना जा रहा है, जो आने वाले समय में चिकित्सा क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है।
