संयुक्त अरब अमीरात पर हुए हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए यूएई के प्रति भारत का पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है। इस हमले में तीन भारतीय नागरिकों के घायल होने पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत संकट की इस घड़ी में यूएई के साथ मजबूती से खड़ा है और क्षेत्र में शांति व स्थिरता के लिए बातचीत और कूटनीति के माध्यम से मुद्दों के समाधान का समर्थन करता है। पीएम मोदी ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का बिना किसी रुकावट के आवागमन सुनिश्चित करना पूरी दुनिया के लिए आवश्यक है।
यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने भी ईरान द्वारा किए गए इन हमलों को संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन करार दिया। उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के प्रति एकजुटता दिखाते हुए ईरान से मिडिल ईस्ट में सीजफायर बनाए रखने और तनाव कम करने के लिए वार्ता में शामिल होने का आग्रह किया। इसी सुर में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने हमलों की निंदा करते हुए तेहरान को चेतावनी दी कि उसे होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी तुरंत खत्म करनी चाहिए और बातचीत की मेज पर वापस लौटना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से बचना होगा और क्षेत्र में सहयोगियों के खिलाफ किसी भी तरह की धमकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी ईरान की इस कार्रवाई को बिना किसी उकसावे के किया गया हमला बताया। मार्क कार्नी ने यूएई द्वारा नागरिकों की सुरक्षा के लिए किए गए बचाव कार्यों की सराहना की और कूटनीतिक समाधान की अपनी अपील दोहराई। वहीं, ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने खाड़ी क्षेत्र में अपने साझेदारों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब इस तनाव को खत्म किया जाए। सभी विश्व नेताओं का साझा मत है कि ईरान को एक जिम्मेदार देश की तरह पेश आना चाहिए और मध्य पूर्व में दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित करने के लिए सार्थक बातचीत का हिस्सा बनना चाहिए।
