प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नई दिल्ली में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेता आपसी हितों के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ रक्षा, व्यापार और सुरक्षा जैसे विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा करेंगे। राष्ट्रपति तो लाम मंगलवार को अपनी तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे हैं, जहाँ हवाई अड्डे पर गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके साथ वियतनाम के वरिष्ठ मंत्रियों, अधिकारियों और एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का दल भी शामिल है। राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभालने के बाद तो लाम की यह पहली भारत यात्रा है, जिसे दोनों देशों के बीच भविष्य के सहयोग का नया ढांचा तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत और वियतनाम की यह व्यापक रणनीतिक साझेदारी पिछले कुछ वर्षों में तेजी से परिपक्व हुई है। वर्ष 2016 में शुरू हुई इस साझेदारी ने न केवल राजनीतिक भरोसे को मजबूत किया है, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी शानदार नतीजे दिए हैं। आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार साल 2016 के 5.4 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 16.46 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। साल 2026 की शुरुआत भी बेहद सकारात्मक रही है, जहाँ पहली तिमाही में ही व्यापार में 28 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वियतनाम से भारत को मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी का निर्यात होता है, जबकि भारत से वियतनाम को फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और स्टील जैसी आवश्यक वस्तुएं भेजी जाती हैं, जो वहां के औद्योगिक ढांचे को मजबूती प्रदान करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में भारत और वियतनाम की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक बन चुकी हैं। जहाँ भारत सॉफ्टवेयर और कच्चे माल में अग्रणी है, वहीं वियतनाम मैन्युफैक्चरिंग और वैश्विक व्यापार नेटवर्क में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। यह तालमेल दोनों देशों को वैश्विक सप्लाई चेन के पुनर्गठन में अहम भूमिका निभाने का अवसर देता है। निवेश के क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंध प्रगाढ़ हो रहे हैं, जिसमें भारतीय कंपनियां वियतनाम के विभिन्न शहरों में सक्रिय हैं, तो वहीं वियतनामी कंपनियां भारत में इलेक्ट्रिक वाहन जैसे आधुनिक क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं। यह यात्रा न केवल व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगी, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग के नए द्वार भी खोलेगी।
