बंगाली कैलेंडर के अनुसार वैशाख महीने के 25वें दिन यानी ‘पोचिशे बोइशाख’ के पावन अवसर पर आज पूरा देश महान कवि, दार्शनिक और नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मना रहा है। इस उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुदेव को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय समाज को न केवल नई सोच और रचनात्मक ऊर्जा प्रदान की, बल्कि सांस्कृतिक आत्मविश्वास से भी ओतप्रोत किया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से टैगोर को एक असाधारण प्रतिभा वाला लेखक और चिंतक बताते हुए कहा कि वे भारत की सभ्यतागत आत्मा की एक कालजयी आवाज थे और उनकी रचनाएं आज भी मानवता की गहरी भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी इस विशेष अवसर पर अपनी विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि गुरुदेव का योगदान साहित्य के दायरे से कहीं अधिक व्यापक था। उन्होंने टैगोर को एक अग्रणी विचारक और शिक्षाविद् के रूप में याद किया, जिनकी शिक्षाएं आने वाली पीढ़ियों के मनों को निरंतर आलोकित करती रहेंगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुदेव को नमन करते हुए रेखांकित किया कि टैगोर ने अपनी रचनाओं और दर्शन के माध्यम से गुलामी के कठिन दौर में स्वतंत्रता की चेतना को एक नई शक्ति प्रदान की थी। अमित शाह ने विशेष रूप से ‘गीतांजलि’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कृतियां देश की एकता, गरिमा और मानवीय मूल्यों का जीवंत प्रमाण हैं।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी उन्हें एक कालजयी कवि और रहस्यवादी चिंतक बताते हुए उनके सार्वभौमिक मानवतावाद के आदर्शों की प्रशंसा की। उल्लेखनीय है कि 7 मई 1861 को कोलकाता में जन्मे रवींद्रनाथ टैगोर वर्ष 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले गैर-यूरोपीय व्यक्तित्व बने थे। उन्हें भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका के राष्ट्रगान लिखने का अनूठा गौरव प्राप्त है। आज ‘पोचिशे बोइशाख’ के दिन पश्चिम बंगाल सहित देशभर के शिक्षण संस्थानों और सांस्कृतिक केंद्रों में ‘रवींद्र संगीत’, कविता पाठ और नृत्य नाटकों के माध्यम से उनकी महान विरासत को याद किया जा रहा है।
