मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार पशुपालकों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर महत्वपूर्ण कदम उठा रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं। राज्य सरकार के प्रभावी प्रयासों और डेयरी क्षेत्र में किए गए नीतिगत सुधारों के फलस्वरूप प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021-22 में राज्य का औसत दुग्ध उत्पादन जहाँ 50.92 लाख लीटर प्रतिदिन था, वहीं वर्तमान सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और तकनीकी हस्तक्षेप के कारण वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 54.59 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुँच गया है। यह वृद्धि न केवल राज्य की डेयरी क्षमता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण अंचलों में रोजगार के नए अवसरों और आर्थिक स्थिरता का भी प्रमाण है।
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, दुग्ध उत्पादन में आई यह महत्वपूर्ण तेजी उत्तराखंड के पशुपालकों की खुशहाली और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण का प्रतीक है। राज्य सरकार पशुपालकों को उचित मूल्य दिलाने, उन्नत नस्ल के पशुओं के संवर्धन और दुग्ध समितियों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
डेयरी क्षेत्र में आ रहे इस सकारात्मक बदलाव ने न केवल छोटे पशुपालकों के आत्मविश्वास को बढ़ाया है, बल्कि रिवर्स माइग्रेशन यानी गांवों की ओर वापसी की दिशा में भी एक संबल प्रदान किया है। मुख्यमंत्री धामी का मानना है कि आत्मनिर्भर पशुपालक ही आत्मनिर्भर उत्तराखंड की नींव रखेंगे और सरकार इस विजन को साकार करने के लिए भविष्य में भी तकनीकी सहायता और वित्तीय प्रोत्साहन जारी रखेगी।
