बाजार नियामक SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने शनिवार को इंडेक्स और स्टॉक डेरिवेटिव्स के एक्सपायरी-डे सेटलमेंट प्राइस की गणना पद्धति में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। यह कदम हाल ही में लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) फ्रेमवर्क की समीक्षा के बाद उठाया गया है।
SEBI ने एक परामर्श पत्र (Consultation Paper) जारी कर सेटलमेंट प्राइस तय करने के लिए दो विकल्प प्रस्तावित किए हैं:
- कंटीन्यूअस ट्रेडिंग सेशन (CTS) के अंतिम 30 मिनट और 10 मिनट के CAS के दौरान हुए सौदों पर आधारित ब्लेंडेड वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP)।
- मौजूदा CTS VWAP पद्धति को ही जारी रखना।
बाजार सहभागियों द्वारा एक्सपायरी पर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के निपटान के लिए CAS-आधारित क्लोजिंग प्राइस के इस्तेमाल पर प्रतिक्रियाएं मिलने के बाद यह प्रस्ताव सामने आया है। दरअसल, SEBI ने 3 अगस्त से इक्विटी कैश सेगमेंट में सिक्योरिटीज का क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए CAS फ्रेमवर्क शुरू किया था। वर्तमान व्यवस्था में CAS के जरिए तय क्लोजिंग प्राइस ही एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट का आधार बनता है, जिसे लेकर मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने चिंता जताई थी।
इससे पहले 3 सितंबर को SEBI ने संकेत दिया था कि वह जल्द ही इस संबंध में परामर्श पत्र जारी करेगा। इन प्रस्तावित बदलावों का मुख्य उद्देश्य एक्सपायरी-डे सेटलमेंट को लेकर बाजार की चिंताओं को दूर करना है। सेबी ने इन प्रस्तावों पर 3 अक्टूबर तक हितधारकों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं।
