पूर्व केंद्रीय मंत्री बृजभूषण शरण सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का समर्थन करते हुए कहा है कि यदि प्रधानमंत्री ने कोई बात कही है तो उसके पीछे ठोस और तथ्यात्मक आधार अवश्य होंगे। उन्होंने कहा कि घुसपैठ पश्चिम बंगाल के रास्ते हो रही है, यह कोई नई बात नहीं है और यह प्रक्रिया लंबे समय से जारी है। बृजभूषण शरण सिंह ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार इस मुद्दे पर वोट बैंक की राजनीति कर रही है और इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़ा यह विषय बेहद संवेदनशील है और केंद्र तथा राज्य सरकारों को मिलकर इस पर ठोस और प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि अवैध घुसपैठ को रोका जा सके।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि राहुल गांधी अक्सर विवादित और तर्कहीन बयान देते हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस एक विशाल सामाजिक संगठन है, जो लंबे समय से देश और हिंदुत्व के लिए कार्य कर रहा है। संघ का उद्देश्य समाज को एकजुट करना और राष्ट्र सेवा है, न कि राजनीतिक लाभ लेना।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर चिंता जताते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वहां हिंदुओं की आबादी लगातार घट रही है। उन्होंने कहा कि देश के बंटवारे के समय बांग्लादेश में हिंदुओं की संख्या कितनी थी और आज कितनी रह गई है, यह अपने आप में एक गंभीर सवाल है। उन्होंने भारत सरकार से इस मुद्दे पर ध्यान देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे उठाने की अपील की।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान का समर्थन करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भाजपा के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के हित में काम करता है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब हटाने के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्होंने वह दृश्य देखा है और उसमें किसी प्रकार की बेइज्जती नहीं थी। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक ममता भरे भाव को दर्शाती है और इसे बेवजह विवाद का विषय बनाया जा रहा है।
अंत में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि देश की राजनीति में ऐसे मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए जो विकास, एकता और राष्ट्रहित से जुड़े हों। उन्होंने कहा कि अनावश्यक विवादों को बढ़ावा देने के बजाय सभी को देश के विकास और सामाजिक समरसता पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
