जिले के सरकारी मिडिल और उच्च विद्यालयों में अब पारंपरिक शिक्षा के साथ डिजिटल और तकनीकी शिक्षा को भी तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। शिक्षा विभाग की पहल पर जिले के दर्जनों सरकारी विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब की सुविधा शुरू की गई है, जिससे छात्र-छात्राएं आधुनिक तकनीक से जुड़कर नई सीख हासिल कर रहे हैं। इसका उद्देश्य बच्चों को शुरुआती स्तर से ही डिजिटल रूप से सक्षम बनाना है ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।
इस्लामिया प्लस टू हाई स्कूल में संचालित कंप्यूटर लैब और स्मार्ट क्लास इस बदलाव की एक बेहतरीन मिसाल बनकर सामने आई है। यहां छात्रों को नियमित पढ़ाई के साथ प्रतिदिन कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। छात्राओं पूजा कुमारी और चांदनी कुमारी ने बताया कि पहले उन्होंने कभी कंप्यूटर का उपयोग नहीं किया था, लेकिन अब स्कूल में उन्हें कंप्यूटर ऑपरेट करना, टाइपिंग, एमएस वर्ड, पेंट और अन्य तकनीकी जानकारियां सिखाई जा रही हैं। उनका कहना है कि कंप्यूटर शिक्षा मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और भविष्य में इसका उन्हें काफी फायदा मिलेगा।
विद्यालयों में स्मार्ट क्लास के माध्यम से पढ़ाई को भी रोचक और आसान बनाया जा रहा है। विज्ञान, गणित और भूगोल जैसे विषय अब वीडियो, ग्राफिक्स और एनिमेशन के जरिए समझाए जा रहे हैं। छात्राओं स्मृति कुमारी और सोनम कुमारी ने बताया कि पहले जो विषय कठिन लगते थे, वे अब स्मार्ट क्लास में आसानी से समझ में आने लगे हैं। वीडियो प्रेजेंटेशन के जरिए पढ़ाई होने से बच्चों की सीखने और समझने की क्षमता में सुधार हो रहा है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहम्मद मुख्तार सईद ने बताया कि स्कूल में नौवीं से बारहवीं तक करीब 1100 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। सभी विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा का लाभ मिल सके, इसके लिए रोटेशन के आधार पर अलग-अलग दिनों में कंप्यूटर लैब और स्मार्ट क्लास में पढ़ाई कराई जाती है।
विद्यालय के सचिव सम्बिल हैदर ने कहा कि डिजिटल शिक्षा से बच्चों में नई तकनीकों के प्रति रुचि बढ़ रही है। इससे छात्रों का आत्मविश्वास मजबूत हो रहा है और वे आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ खुद को जोड़ पा रहे हैं।
तनवीर आलम ने बताया कि पहले जिले के 40 विद्यालयों में आईसीटी लैब संचालित हो रही थी, लेकिन अब 33 नए विद्यालयों में भी कंप्यूटर लैब शुरू कर दी गई है। इन स्कूलों में कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर की नियुक्ति की गई है, जो बच्चों को नियमित रूप से तकनीकी प्रशिक्षण दे रहे हैं। बच्चों को एमएस वर्ड, एक्सेल, इंटरनेट रिसर्च, डिजिटल प्रेजेंटेशन और कंप्यूटर की अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी जा रही हैं।
शिक्षा विभाग का मानना है कि डिजिटल शिक्षा बच्चों के भविष्य को नई दिशा देगी। इससे छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। जिले के कुल 77 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब की व्यवस्था शुरू होने से सरकारी स्कूलों में शिक्षा की तस्वीर तेजी से बदलती नजर आ रही है।
