बिहार के बेगूसराय जिले के बीरपुर प्रखंड में जीविका द्वारा संचालित सामुदायिक पुस्तकालय एवं करियर विकास केंद्र ग्रामीण क्षेत्र के गरीब और वंचित छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। यह पुस्तकालय न केवल विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन वातावरण उपलब्ध करा रहा है, बल्कि उन्हें करियर मार्गदर्शन और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित कर रहा है। खासतौर पर ग्रामीण छात्राओं के लिए यह केंद्र एक सुरक्षित और शांत अध्ययन स्थल के रूप में सामने आया है।
पुस्तकालय में अध्ययन के लिए शांत वातावरण, बैठने की समुचित व्यवस्था और विभिन्न विषयों की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। यहां आने वाली छात्राओं का कहना है कि घर में पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल नहीं मिलने के कारण उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन इस पुस्तकालय ने उनकी पढ़ाई को नई दिशा दी है। पुस्तकालय की ‘विद्या दीदी’ अनु कुमारी ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बच्चियों को यहां नि:शुल्क अध्ययन सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि “सेकंड चांस” कार्यक्रम के माध्यम से उन छात्राओं को भी शिक्षा से जोड़ा जा रहा है, जो किसी कारणवश दसवीं की परीक्षा पास नहीं कर सकीं।
पुस्तकालय में पढ़ाई कर रही छात्रा डॉली कुमारी ने बताया कि यहां उन्हें शांत और सकारात्मक वातावरण मिलता है, जिससे पढ़ाई में ध्यान लगाने में आसानी होती है। वहीं वंदना कुमारी ने कहा कि यह पुस्तकालय निजी लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं प्रदान करता है, जहां स्वच्छ पेयजल और आरामदायक बैठने की व्यवस्था उपलब्ध है। छात्रा ज्योति कुमारी ने बताया कि अलग-अलग विषयों की पर्याप्त किताबें होने से उन्हें अपनी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी में काफी मदद मिल रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह पहल ग्रामीण शिक्षा को बढ़ावा देने और छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम साबित हो रही है।
