आज 30 अप्रैल 2026 को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है और ब्रेंट क्रूड का भाव 112 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। इस उछाल का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और विशेष रूप से ईरान के साथ जारी संघर्ष है जिसने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के बाधित होने की आशंकाओं और अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों ने बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है जिसके चलते कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। विश्व बैंक और अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों ने चेतावनी दी है कि यदि यह तनाव जल्द शांत नहीं हुआ तो कच्चे तेल की कीमतें 115 से 120 डॉलर तक भी जा सकती हैं जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा साबित होगा।
कच्चे तेल की इन बढ़ती कीमतों का वैश्विक प्रभाव अत्यंत व्यापक और चिंताजनक होता जा रहा है क्योंकि इससे दुनिया भर में मुद्रास्फीति यानी महंगाई दर बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है क्योंकि आयात बिल बढ़ने से राजकोषीय घाटे पर दबाव बढ़ता है और परिवहन लागत में वृद्धि के कारण दैनिक उपभोग की वस्तुएं महंगी हो जाती हैं। हालांकि भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का इस ऊंचे स्तर पर बने रहना लंबे समय में घरेलू बाजार में भी ईंधन की कीमतों में इजाफे का संकेत दे रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान आपूर्ति संकट और ओपेक देशों द्वारा उत्पादन में की गई कटौती ने बाजार में तेल की कमी पैदा कर दी है जिससे आने वाले हफ्तों में भी कीमतों में नरमी आने की संभावना काफी कम दिखाई दे रही है।
