सुबह की पहली किरण के साथ ही गड़खा प्रखंड के महम्दा पंचायत स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-199 में एक अलग ही रौनक छा जाती है। यहां का दृश्य किसी सामान्य केंद्र से बिल्कुल अलग और प्रेरणादायी है, जहां नन्हे-मुन्हे बच्चे बड़ी उत्सुकता के साथ खुद अपने हाथों से पालक और साग तोड़ते हुए नजर आते हैं। यह केवल एक दिनचर्या नहीं, बल्कि उस बड़े सकारात्मक बदलाव की जीवंत तस्वीर है, जिसने इस आंगनबाड़ी केंद्र को न केवल बच्चों के लिए पोषण का केंद्र बनाया है, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य और शिक्षा का एक बेहतर वातावरण भी प्रदान किया है।
एक समय था जब यह केंद्र बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा था और पोषण को लेकर जागरूकता की कमी के कारण बच्चों की उपस्थिति भी बहुत कम रहती थी। लेकिन आज यहां का परिवेश पूरी तरह बदल चुका है। अब यहां के बच्चे बोरी या चट्टी पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर नहीं हैं, बल्कि व्यवस्थित और आधुनिक बेंचों पर बैठकर शिक्षा प्राप्त करते हैं। केंद्र की दीवारों पर बने रंग-बिरंगे चित्र और आकर्षक सजावट इसे किसी अच्छे प्ले-स्कूल जैसा रूप देती है। केंद्र में वर्तमान में लगभग 30 बच्चे नामांकित हैं, साथ ही 6 गर्भवती महिलाएं भी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी हैं। बिजली, पंखा, शौचालय और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता ने यहां की कार्यप्रणाली को और अधिक सुदृढ़ किया है, जिससे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को नई दिशा मिल रही है।
इस बदलाव की सबसे बड़ी और प्रभावी आधारशिला केंद्र परिसर में विकसित ‘पोषण वाटिका’ है। आंगनबाड़ी परिसर में ही एक छोटी सी बगिया तैयार की गई है, जिसमें बैंगन, टमाटर, पालक, धनिया, नींबू, अमरूद और केला जैसे कई फल और सब्जियां उगाई जा रही हैं। इन ताजी और जैविक सब्जियों का उपयोग सीधे बच्चों के भोजन में किया जाता है, जिससे उन्हें न केवल शुद्ध और पौष्टिक आहार मिल रहा है, बल्कि उनमें हरी सब्जियों के प्रति रुचि भी पैदा हुई है। आंगनबाड़ी सेविका कंचन कुमारी के समर्पण और प्रयासों से बच्चों के व्यवहार में स्पष्ट सकारात्मक बदलाव देखा गया है। अब बच्चे उत्साह के साथ सब्जियां खाते हैं और पहले से कहीं अधिक स्वस्थ, सक्रिय व खुश नजर आते हैं। यह मॉडल पूरे क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन गया है, जो यह साबित करता है कि सही मार्गदर्शन और छोटी सी पहल से बड़े बदलाव संभव हैं।
