महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के संसद में पारित न होने को लेकर उपजे असंतोष के चलते एनडीए की महिला कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर अपना जोरदार आक्रोश व्यक्त किया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और विधेयक के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए यह मांग रखी कि इसे अविलंब संसद से पारित किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह विधेयक केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि देश की आधी आबादी के सशक्तिकरण और राजनीति में उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आवश्यक कदम है। उन्होंने अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित इस मुद्दे पर अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस अवसर पर भाजपा की सक्रिय नेत्री अमृता भूषण ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सरकार को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को समान अधिकार और उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए यह विधेयक बेहद अनिवार्य है और इसके बार-बार टलने से देश भर की महिलाओं में गहरा निराशा का माहौल व्याप्त है। उन्होंने सरकार से भावनात्मक और राजनीतिक अपील करते हुए कहा कि महिलाओं के हितों और उनकी आकांक्षाओं को सर्वोपरि रखते हुए इस विधेयक पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लिया जाना चाहिए। प्रदर्शन में शामिल अन्य महिलाओं ने भी इस बात पर जोर दिया कि जब तक उन्हें विधायिका में उनका हक नहीं मिलेगा, तब तक वे इस आंदोलन को निरंतर जारी रखेंगी और अपनी आवाज को शासन के उच्च गलियारों तक पहुंचाती रहेंगी। यह प्रदर्शन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर अब आम महिलाओं का धैर्य जवाब दे रहा है और वे अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
