होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने की घोषणा और वैश्विक स्तर पर कम होते भू-राजनीतिक तनाव के बीच दुनिया भर के इक्विटी बाजारों में जोरदार उछाल देखने को मिला है। कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने वैश्विक स्तर पर निवेशकों का जोखिम लेने का साहस बढ़ाया है। अमेरिकी बाजारों में इस सकारात्मक रुख का सीधा प्रभाव देखा गया, जहां डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज लगभग 1.8 प्रतिशत की तेजी के साथ चढ़ा। इसके साथ ही एसएंडपी 500 और नैस्डैक कंपोजिट सूचकांकों में भी 1 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जिसे तेल की कीमतों में कमी का बड़ा समर्थन मिला।
यूरोपीय बाजारों ने भी इस वैश्विक सकारात्मक रुझान का अनुसरण किया और बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। जर्मनी के डैक्स (DAX) सूचकांक में करीब 2.2 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया, जबकि फ्रांस के कैक 40 (CAC 40) और स्पेन के आईबेक्स 35 (IBEX 35) सूचकांकों में 1.9 से 2 प्रतिशत के बीच मजबूती देखी गई। हालांकि, ब्रिटेन के एफटीएसई 100 (FTSE 100) का प्रदर्शन अपेक्षाकृत धीमा रहा और यह केवल 0.7 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ, जिसका मुख्य कारण तेल की कीमतों में आई गिरावट के चलते वहां की प्रमुख तेल कंपनियों के शेयरों पर पड़ा नकारात्मक दबाव रहा।
एशियाई बाजारों का प्रदर्शन इस दौरान काफी मिला-जुला रहा, जिसमें निवेशकों की सतर्कता और आशावाद दोनों का मिश्रण दिखाई दिया। भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों ने मजबूती बनाए रखी, जिसमें निफ्टी 50 ने 24,350 के स्तर के ऊपर अपनी स्थिति सुरक्षित की और सेंसेक्स 78,493 के स्तर पर बंद हुआ। दोनों भारतीय सूचकांकों में लगभग 0.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्था के रूप में भारत के लिए राहत की बात है। इसके विपरीत, जापान का निक्केई 225 सूचकांक 1.75 प्रतिशत लुढ़क गया, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक लगभग 0.9 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। चीन के शंघाई कंपोजिट और ऑस्ट्रेलिया के एसएंडपी/एएसएक्स 200 सूचकांकों में भी 0.1 प्रतिशत की मामूली गिरावट रही, जो मुनाफावसूली और युद्धविराम के टिकाऊपन को लेकर बनी अनिश्चितता को दर्शाता है।
इस अंतर का मुख्य कारण यह रहा कि अधिकांश एशियाई बाजार ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य के “पूरी तरह खुलने” की औपचारिक घोषणा होने से पहले ही बंद हो चुके थे, जिसके चलते इस महत्वपूर्ण घटना का सकारात्मक प्रभाव एशियाई बाजारों की क्लोजिंग कीमतों पर पूरी तरह से परिलक्षित नहीं हो सका।
