अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) ने कहा है कि ईरान संघर्ष और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के आर्थिक प्रभाव के बावजूद भारत वैश्विक आर्थिक विकास का प्रमुख चालक बना हुआ है।
आईएमएफ के संचार विभाग की निदेशक जूली कोज़ैक ने नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू मांग भारत की आर्थिक स्थिरता को सहारा दे रही है।
International Monetary Fund ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। यह अप्रैल में किए गए संशोधित अनुमान के अनुरूप है।
जूली कोज़ैक ने कहा कि यह अनुमान पिछले वर्ष की मजबूत आर्थिक गति और अमेरिकी टैरिफ दरों में कमी को दर्शाता है, जिसने वैश्विक ऊर्जा झटकों के प्रभाव को कम करने में मदद की।
उन्होंने बताया कि कैलेंडर वर्ष की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था ने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है।
आईएमएफ ने मध्य पूर्व में हालिया युद्धविराम और होरमुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की दिशा में प्रगति को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। आईएमएफ के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें अपने उच्चतम स्तर से नीचे आई हैं, हालांकि वे अभी भी संघर्ष-पूर्व स्तर से लगभग 10 प्रतिशत अधिक हैं। साथ ही, अन्य कई कमोडिटी कीमतों में भी नरमी देखने को मिल रही है।
International Monetary Fund 8 जुलाई को अपनी अद्यतन वैश्विक आर्थिक रिपोर्ट जारी करेगा।
