आरबीआई की चार दिवसीय परिवर्तनीय दर रेपो (वीआरआर) नीलामी में आज बैंकों ने केवल 16,800 करोड़ रुपये उधार लिए, जबकि अधिसूचित राशि 50,000 करोड़ रुपये थी। इससे संकेत मिलता है कि बैंकिंग प्रणाली में फिलहाल तरलता की स्थिति अपेक्षाकृत सहज बनी हुई है।
आरबीआई के अनुसार, बैंकों ने कुल 16,800 करोड़ रुपये की बोलियां लगाईं, जिन्हें पूरी तरह स्वीकार कर लिया गया।
नीलामी में कट-ऑफ दर और भारित औसत दर 5.26 प्रतिशत रही, जो नीतिगत रेपो दर 5.25 प्रतिशत से मामूली अधिक है।
केंद्रीय बैंक ने तरलता समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत बैंकिंग प्रणाली को अल्पकालिक तरलता उपलब्ध कराने के लिए चार दिवसीय वीआरआर नीलामी की घोषणा की थी।
अधिसूचित राशि की तुलना में कम मांग यह दर्शाती है कि बैंकों को सीमित तरलता सहायता की ही आवश्यकता पड़ी, जबकि आरबीआई ने नीलामी के माध्यम से 50,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए थे।
परिवर्तनीय दर रेपो नीलामी के जरिए आरबीआई बैंकिंग प्रणाली में नकदी प्रवाह बढ़ाता है। इसमें बैंक बाजार आधारित ब्याज दरों पर धनराशि के लिए बोली लगाते हैं।
