अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों तक चले संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण शांति समझौता अंतिम रूप ले चुका है। इस समझौते के तहत वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोला जाएगा। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी संकरे समुद्री मार्ग से होता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस समझौते की घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अपने नौसैनिक अवरोध को समाप्त करेगा। उन्होंने बताया कि शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे और इसके आधिकारिक रूप से लागू होने के बाद शुक्रवार से होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दिया जाएगा।
ट्रंप ने कहा कि यह “महान समझौता” पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लाने का काम करेगा। समझौते के अनुसार, अमेरिका और ईरान अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु संवर्धन कार्यक्रम और उसके पास मौजूद उच्च संवर्धित यूरेनियम के निपटान को लेकर वार्ता करेंगे।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी घोषणा की है कि आज रात से युद्ध और सभी सैन्य अभियान स्थायी रूप से समाप्त कर दिए जाएंगे। इसमें लेबनान सहित विभिन्न मोर्चों पर चल रही सैन्य गतिविधियां भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त हमले शुरू किए थे। इन हमलों में ईरान के कई शीर्ष नेताओं की मौत हुई। इनमें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारिजानी, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर मोहम्मद पाकपोर और रक्षा मंत्री अज़ीज़ नासिरजादेह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
खामेनेई की मृत्यु के बाद उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता बनाया गया है। हालांकि युद्ध शुरू होने के बाद से वह सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। इस समझौते को पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
