उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विस्तृत चर्चा का प्रस्ताव सदन के पटल पर रखा। इस महत्वपूर्ण अवसर पर मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्हें महिला प्रगति के मार्ग में बाधक बताया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का संशोधन वास्तव में 2019 में ही लागू हो जाना चाहिए था, किंतु कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन के विरोध के कारण इसमें विलंब हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आज महिलाएं अपनी प्रतिभा और कड़े परिश्रम के बल पर हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही हैं, तो विपक्षी दल उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नीति-निर्धारण में भागीदारी देने के अधिकार का विरोध क्यों कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने 17 अप्रैल को लोकसभा में इस अधिनियम के प्रस्ताव को गिराने के लिए सपा, कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी की आलोचना करते हुए इसे देश के लिए एक कलंकित आचरण करार दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में जोर देकर कहा कि महिला स्वावलंबन और सशक्तीकरण के मार्ग में आने वाली बाधाओं को चिन्हित करना आवश्यक है और इसमें देश के सबसे बड़े विधानमंडल के रूप में उत्तर प्रदेश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2023 में पारित यह अधिनियम महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की दिशा में किए गए प्रयासों का एक ऐतिहासिक परिणाम है।
वर्तमान स्थिति का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय संसद में महिलाओं की संख्या अभी मात्र 15 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश विधानसभा में केवल 11-12 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने से आधी आबादी को उनका वास्तविक अधिकार मिलेगा, जिससे महिलाओं से जुड़े विषयों पर अधिक प्रभावी चर्चा संभव हो सकेगी। विपक्ष के रवैये पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने अंत में दोहराया कि आधी आबादी के सम्मान और सुरक्षा के लिए उठाए गए हर प्रगतिशील कदम का समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने हमेशा विरोध किया है, जो उनके महिला-विरोधी चरित्र को उजागर करता है।
