उत्तर प्रदेश विधान परिषद में आज नारी सशक्तिकरण और नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम को लेकर गहमागहमी भरी चर्चा हुई। सदन की कार्यवाही के दौरान नेता सदन और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें समाज में उचित सम्मान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है. उन्होंने विपक्ष पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि विपक्षी दलों के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार और विरोध के कारण ही यह महत्वपूर्ण संशोधन अधिनियम पारित नहीं हो सका. श्री मौर्य ने सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार महिलाओं की सच्ची हितैषी है और महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करती है. इसके विपरीत, नेता विरोधी दल लाल बिहारी यादव ने इस विधेयक का विरोध किया और इसे ‘अपूर्ण’ करार दिया.
चर्चा में भाग लेते हुए शिक्षक दल के ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कहा कि इस अधिनियम को गिराने का कोई तार्किक औचित्य नहीं था, क्योंकि यह न केवल समय की मांग थी बल्कि विकसित भारत की संकल्पना का आधार भी था. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य नारी शक्ति वंदन के विचार को धरातल पर उतारना था. वहीं, राष्ट्रीय लोक दल के योगेश चौधरी ने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इस विधेयक के माध्यम से ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों की महिलाओं को व्यापक लाभ पहुंचता. भाजपा की डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी ने समाजवादी पार्टी की कड़ी आलोचना की और कहा कि बिल को पारित न होने देना सीधे तौर पर महिलाओं का अपमान है, जिसे महिला समाज कभी नहीं भूलेगा.
सदन में भाजपा की रमा निरंजन ने रेखांकित किया कि आज भारत की नारी हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है और सरकार अपनी महिलापरक योजनाओं के जरिए हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी सुनिश्चित कर रही है. महिला कल्याण एवं बाल विकास पुष्टाहार राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने भी विधेयक का पुरजोर समर्थन किया. इस महत्वपूर्ण विमर्श में भाजपा के भूपेंद्र चौधरी, देवेंद्र प्रताप सिंह और सपा के राजेंद्र चौधरी ने भी अपने-अपने विचार साझा किए. चर्चा के अंत में विधान मंडल में नारी सशक्तिकरण के मुद्दे पर एक निंदा प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया, जिसे सदन ने ध्वनिमत से स्वीकार कर लिया. इसके पश्चात, दोनों सदनों की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई.
