पूर्णिया व्यवहार न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया, जिसे अब तक के सबसे बड़े आयोजनों में से एक माना जा रहा है। इस विशेष अवसर पर न्यायालय परिसर में सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे फरियादी, वादकारी और उनके परिजन न्यायालय परिसर में अपने मामलों के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचे थे। पूरे परिसर का माहौल किसी बड़े जनसमूह या मेले जैसा दिखाई दे रहा था। लंबे समय से न्यायालयों के चक्कर काट रहे लोगों के चेहरे पर इस बार उम्मीद और संतोष साफ दिखाई दे रहा था।
राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों का त्वरित निष्पादन करने का लक्ष्य रखा गया था। विशेष रूप से ऐसे मामलों पर ध्यान केंद्रित किया गया जिनका समाधान आपसी सुलह और सहमति के आधार पर संभव है। वर्षों से लंबित छोटे-छोटे विवाद, पारिवारिक मामले, लेन-देन संबंधी विवाद, मोटर वाहन चालान, यातायात संबंधी प्रकरण और अन्य कई प्रकार के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने की व्यवस्था की गई थी।
न्यायालय परिसर में बनाए गए विभिन्न कक्षों और सहायता केंद्रों पर लोगों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही थी। न्यायिक अधिकारियों के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारी भी पूरे दिन सक्रिय रूप से व्यवस्था संभालते नजर आए। लोगों की सुविधा के लिए अलग-अलग प्रकरणों के अनुसार काउंटर बनाए गए थे ताकि किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्वयं पूरे आयोजन की निगरानी कर रहे थे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार बैठक कर मामलों के निष्पादन की प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए। न्यायिक पदाधिकारियों का कहना था कि राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लोगों को शीघ्र और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें वर्षों तक अदालतों के चक्कर न लगाने पड़ें।
विशेष रूप से यातायात और चालान संबंधी मामलों के निष्पादन पर भी अधिक जोर दिया गया। बड़ी संख्या में लोग अपने लंबित चालान और छोटे विवादों का समाधान कराने पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजनों से न केवल लोगों का समय और धन बचता है, बल्कि न्यायालयों पर बढ़ते मामलों का बोझ भी काफी हद तक कम होता है।
लोक अदालत में पहुंचे कई लोगों ने बताया कि सामान्य न्यायिक प्रक्रिया में मामलों के निपटारे में काफी समय लग जाता है और बार-बार तारीख मिलने से आम लोगों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में राष्ट्रीय लोक अदालत उनके लिए राहत का माध्यम बनकर सामने आई है। लोगों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समय-समय पर होते रहने चाहिए ताकि न्याय व्यवस्था आम जनता के लिए और अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी बन सके।
स्थानीय नागरिकों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भी इस पहल की सराहना की। उनका कहना था कि आपसी समझौते और सहमति के आधार पर मामलों का समाधान समाज में सौहार्द और विश्वास बढ़ाने का कार्य करता है। साथ ही इससे लोगों का न्याय व्यवस्था के प्रति भरोसा भी मजबूत होता है। राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन को लेकर प्रशासन और न्यायिक अधिकारियों ने संतोष व्यक्त किया और भविष्य में भी इसी प्रकार बड़े स्तर पर आयोजन जारी रखने की बात कही।
