बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में गंगा नदी पर वाटर मेट्रो सेवा शुरू करने को लेकर एक बड़ी घोषणा की है, जिससे राजधानी के सार्वजनिक परिवहन और पर्यटन को एक नई दिशा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले एक से डेढ़ महीने के भीतर, यानी जून के महीने में पटना में वाटर मेट्रो सेवा की विधिवत शुरुआत कर दी जाएगी। वर्तमान में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए गांधी घाट, कंगन घाट और दीघा घाट पर चार्जिंग प्वाइंट के निर्माण का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। लगभग साढ़े दस किलोमीटर के दायरे में संचालित होने वाली यह परियोजना पटना को कोच्चि के बाद देश का दूसरा ऐसा शहर बना देगी, जहां आधुनिक शहरी जल आधारित सार्वजनिक परिवहन प्रणाली उपलब्ध होगी। राज्य पर्यटन विभाग द्वारा संचालित इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर यातायात के दबाव को कम करना, नदी परिवहन को बढ़ावा देना और प्रदूषण मुक्त आवागमन का विकल्प प्रदान करना है।
बिजली से संचालित होने वाली यह वाटर मेट्रो शुरुआती चरण में दीघा घाट से कंगन घाट तक के रूट पर चलेगी, जिसमें बीच में गांधी घाट और गाय घाट पर स्टॉपेज की सुविधा दी जाएगी। यह सेवा प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक उपलब्ध रहेगी और प्रत्येक वाटर मेट्रो में लगभग 100 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत करीब 908 करोड़ रुपये है, जिसमें एक अत्याधुनिक नौका की लागत लगभग 12 करोड़ रुपये आ रही है। सरकार ने भविष्य में इस सेवा का विस्तार सोनपुर और वैशाली तक करने की भी योजना बनाई है, जिससे पड़ोसी जिलों के साथ कनेक्टिविटी और अधिक सुदृढ़ होगी।
यह परियोजना कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड के तकनीकी सहयोग से कार्यान्वित की जा रही है, जिसने देश की पहली सफल वाटर मेट्रो प्रणाली विकसित की है। इस सेवा के शुरू होने से न केवल पटना में वायु प्रदूषण और सड़क जाम की समस्या में कमी आने की उम्मीद है, बल्कि नदी किनारे पर्यटन गतिविधियों में भी भारी इजाफा होगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और छोटे व्यवसायों को भी लाभ मिलेगा। गंगा के किनारे विकसित हो रहा यह जल परिवहन नेटवर्क पटना की पहचान को एक वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा।
