बिहार पुलिस मुख्यालय ने राज्य की कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने, प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने और तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान अपर पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) सुनील कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक (विधि-व्यवस्था) सुधांशु रंजन और पुलिस महानिरीक्षक (साइबर) रंजीत कुमार मिश्रा ने संयुक्त रूप से राज्य में किए जा रहे व्यापक सुधारात्मक कदमों और पुलिस की हालिया बड़ी उपलब्धियों का ब्यौरा साझा किया।
अपर पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) सुनील कुमार ने प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने बिहार के पांच बड़े और महत्वपूर्ण जिलों—पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली और सिवान—में ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पांच नए पदों को मंजूरी देते हुए उन्हें सृजित किया है। सरकार के इस कदम से ग्रामीण इलाकों में पुलिस की पहुंच और गश्त को अधिक प्रभावी व मजबूत बनाया जा सकेगा। इन नए ग्रामीण एसपी के अधीन पुलिस निरीक्षक, अवर निरीक्षक, हवलदार और सिपाही स्तर के पुलिसकर्मी पूरी मुस्तैदी से काम करेंगे। संबंधित जिलों के मूल पुलिस अधीक्षक जरूरत के हिसाब से काम का बंटवारा करेंगे, जबकि ग्रामीण एसपी अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से भी अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए अधिकृत होंगे। पुलिस मुख्यालय ने इसे ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा और पुलिस प्रशासन को जमीन पर मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर बताया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के सभी थानों में स्थापित हेल्प डेस्क को पूरी तरह सक्रिय और प्रभावी ढंग से संचालित करने का कड़ा निर्देश दिया गया है ताकि थाने आने वाले आम लोगों की शिकायतों का तुरंत और सम्मानजनक समाधान सुनिश्चित किया जा सके। जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में कटौती से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े फैसले बेहद संवेदनशील प्रकृति के होते हैं, जिन्हें सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया जा सकता है। यह व्यवस्था पूरी तरह से संबंधित माननीय व्यक्तियों की सुरक्षा आवश्यकताओं और सक्षम प्राधिकारी के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही तय की जाती है।
कानून-व्यवस्था और सजा दिलाने के मोर्चे पर एडीजी (विधि-व्यवस्था) सुधांशु रंजन ने साल के शुरुआती चार महीनों के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पुलिस की प्रभावी पैरवी के कारण इस अवधि में दो अलग-अलग जघन्य मामलों में दोषियों को अदालत से मृत्युदंड यानी फांसी की सजा दिलवाई गई है, जबकि 400 से अधिक अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। उन्होंने विशेष रूप से बेगूसराय जिले के एक बेहद चर्चित और सनसनीखेज हत्याकांड का जिक्र किया, जहां एक व्यक्ति के माता-पिता और उसकी बहन की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, इस मामले में मुख्य दोषी को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। इसके अलावा अरवल जिले के मेहंदिया थाना क्षेत्र के एक बेहद क्रूर और जघन्य मामले में, जिसमें अभियुक्त ने अपनी ही पत्नी की बेरहमी से हत्या कर शव के कई टुकड़े कर दिए थे, उसे भी कानून के तहत मृत्युदंड की सजा दी गई है।
दूसरी ओर, साइबर अपराध के बढ़ते खतरों पर बात करते हुए पुलिस महानिरीक्षक (साइबर) रंजीत कुमार मिश्रा ने आम नागरिकों से हर समय सतर्क और जागरूक रहने की विशेष अपील की। उन्होंने साइबर सेल की सक्रियता का डेटा साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में साइबर हेल्पलाइन पर रोजाना आने वाली कॉलों की संख्या 5,500 से बढ़कर अब 8,100 से अधिक हो गई है, जिन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए औसतन 430 लिखित शिकायतें हर दिन दर्ज की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में चल रहे “साइबर प्रहार 3.0” विशेष अभियान के तहत फर्जी बैंक खातों और ठगी करने वाले गिरोहों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा रहा है, जिसके तहत अब तक 5,000 से अधिक संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। बिहार पुलिस को साइबर ठगी से संबंधित कुल 199.09 करोड़ रुपये के नुकसान की शिकायतें मिली थीं, जिनमें से पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए पीड़ितों के 7.6 करोड़ रुपये की बड़ी राशि को डूबने से बचाया और उसे वापस कराया है। इस प्रकार की आर्थिक रिकवरी और पीड़ितों का पैसा वापस कराने के मामले में बिहार पुलिस पूरे देश में चौथे स्थान पर काबिज हो गई है।
