बिहार के मुंगेर जिले के असरगंज प्रखंड अंतर्गत चोर पंचायत में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता का प्रतीक ‘ढोल पहाड़ी’ अब जल्द ही राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी चमक बिखेरने के लिए तैयार है। बिहार सरकार ने इस ऐतिहासिक स्थल को एक आधुनिक इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 11 करोड़ 57 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल क्षेत्र के प्राकृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर विकास की गति तेज होगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।
इस महत्वपूर्ण परियोजना की आधिकारिक घोषणा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा की गई थी, जिसके बाद प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी अमरीश कुमार मल्ल और विशेषज्ञों की टीम के साथ स्थल का गहन निरीक्षण किया। जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पीणीकर के मार्गदर्शन में तैयार की गई विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) को राज्य सरकार ने हरी झंडी दे दी है। जिलाधिकारी ने ढोल पहाड़ी की विशिष्टता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह स्थल बाबा मोनीनाथ मंदिर, प्राचीन गुफाओं और अपनी नैसर्गिक सुंदरता के कारण श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए आस्था एवं आकर्षण का केंद्र रहा है। अब यहां आधुनिक सुविधाओं के विस्तार से इसे एक उच्च स्तरीय पर्यटन केंद्र बनाया जाएगा।
विकास कार्यों के खाके के अनुसार, यहाँ पर्यटकों की सुविधा के लिए बैंक्वेट हॉल, आधुनिक सार्वजनिक शौचालय, स्थानीय उत्पादों के लिए हाट-बाजार, क्राफ्ट शॉप्स और ठहरने के लिए विशेष बेडिंग जोन का निर्माण किया जाएगा। साथ ही, बच्चों के मनोरंजन के लिए आकर्षक पार्क और क्षेत्र की पारिस्थितिकी को ध्यान में रखते हुए इको-फ्रेंडली बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा। स्थानीय ग्रामीणों में इस परियोजना को लेकर भारी उत्साह है, क्योंकि ढोल पहाड़ी का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम से भी जुड़ा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि पूर्व विधायक स्वर्गीय डॉ. मेवा लाल चौधरी द्वारा शुरू किए गए शहीद मेले की परंपरा और इस नए विकास कार्य के मेल से यह क्षेत्र मुंगेर जिले की अर्थव्यवस्था और पहचान को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
