भारतीय शेयर बाजार 2025 आउटलुक: पहली छमाही में उतार-चढ़ाव, दूसरी छमाही में रिकवरी की उम्मीद
साल 2025 के पहले छह महीनों में भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की एमके इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में मजबूती की उम्मीद वर्ष की दूसरी छमाही से है।
साल 2025 के पहले छह महीनों में भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की एमके इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में मजबूती की उम्मीद वर्ष की दूसरी छमाही से है। रिपोर्ट के मुताबिक, निकट अवधि में बाजार में कमजोरी बनी रह सकती है, लेकिन रोजगार के बेहतर ट्रेंड, अनसिक्योर्ड लेंडिंग में सुधार और कल्याणकारी योजनाओं पर बढ़ते खर्च से खपत में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिलेगा।
एमके इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का अनुमान है कि दिसंबर 2025 तक निफ्टी 25,000 के स्तर पर पहुंच सकता है। साथ ही, दूसरी छमाही से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली में कमी आने की संभावना जताई गई है। रिसर्च हाउस ने डिस्क्रिशनरी, रियल एस्टेट और हेल्थकेयर सेक्टर में ओवरवेट रुख बरकरार रखा है, जबकि इंडस्ट्रियल, आईटी और एनर्जी पर न्यूट्रल दृष्टिकोण अपनाया है। वहीं, फाइनेंशियल्स, स्टेपल्स और मटेरियल्स पर स्ट्रक्चरल चिंताओं और वैल्यूएशन दबावों के चलते अंडरवेट रहने की सलाह दी गई है।
आईटी सेक्टर में हायरिंग में तेजी, नकदी उपलब्धता में सुधार और रिटेल लेंडिंग के मजबूत होने से आगामी तीन तिमाहियों में डिस्क्रिशनरी खपत में सुधार के संकेत हैं। इसके अलावा, राज्यों द्वारा महिलाओं के लिए घोषित कल्याणकारी योजनाएं और रबी फसल की अच्छी बुआई भी उपभोग में वृद्धि में सहायक हो सकती हैं।
एमके इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपने टॉप निवेश सुझाव भी साझा किए हैं। लार्ज कैप श्रेणी में लुपिन, जोमैटो, टाटा मोटर्स और इंडसइंड बैंक में निवेश की सलाह दी गई है। मिडकैप सेगमेंट में एसकॉर्ट्स, पेटीएम और मेट्रोपोलिस शीर्ष पसंद हैं, जबकि स्मॉलकैप श्रेणी में स्टोवक्राफ्ट और क्वेस कॉर्प को प्रमुख पिक्स में शामिल किया गया है।
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के सीईओ नीरव सेठ ने कहा कि बाजार में तेजी और गिरावट दोनों ही स्थितियों में निवेशकों की प्रतिक्रियाएं तीव्र रही हैं। मौजूदा अस्थिरता के बावजूद भारत की मैक्रो इकॉनॉमिक स्थिति मजबूत है। कम चालू खाता घाटा (CAD), नियंत्रित राजकोषीय घाटा और उदार मौद्रिक नीति इस मजबूती के मुख्य आधार हैं। उन्होंने कहा कि आय में गिरावट का सबसे कठिन दौर बीत चुका है और वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में सरकारी खर्च और टैक्स राहत के कारण उपभोग व्यय में बढ़ोतरी से बाजार में सुधार संभव है। ऐसे में मौजूदा समय को निवेश के लिए अनुकूल माना जा सकता है।
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. firstpagenews.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)