राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज की प्रतिष्ठा: संत समाज ने इसे सनातन गौरव का ऐतिहासिक क्षण बताया

अयोध्या राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज की प्रतिष्ठा को संत समाज ने सनातन आस्था और पाँच सौ वर्षों की संघर्ष यात्रा का ऐतिहासिक क्षण बताया। संतों ने पीएम मोदी और सीएम योगी की भूमिका को निर्णायक माना।

राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज की प्रतिष्ठा: संत समाज ने इसे सनातन गौरव का ऐतिहासिक क्षण बताया

अयोध्या में श्रीराम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज की प्रतिष्ठा का पवित्र और भव्य कार्यक्रम संत समाज के लिए अत्यंत भावपूर्ण तथा ऐतिहासिक क्षण बन गया। पाँच सौ वर्षों की प्रतीक्षा, संघर्ष, तपस्या और आस्था के बाद दिव्य राम मंदिर पर धर्म ध्वज का आरोहण न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सनातन परंपरा की वैश्विक प्रतिष्ठा का उज्ज्वल प्रमाण भी बन रहा है।

संत समाज ने बताया—यह सनातन गौरव का क्षण

अवधपुरी के संत समाज ने इस अवसर को अत्यंत श्रद्धा और भावनाओं के साथ सनातन गौरव का क्षण बताया। संतों का कहना है कि यह वही क्षण है जिसके लिए सैकड़ों वर्षों तक संतों और भक्तों ने अदम्य धैर्य और अटूट विश्वास के साथ संघर्ष किया।
उनके अनुसार, आज उन पूर्वजों का संकल्प साकार हुआ है जिनकी कल्पना सदियों पहले ही रामलला की भव्य उपस्थिति के साथ धर्म ध्वज को अयोध्या के आकाश में लहराते देखने की थी।

आध्यात्मिक विरासत को और मजबूत बनाता है धर्म ध्वज

साधु-संतों ने कहा कि धर्म ध्वज का मंदिर के शिखर पर आरोहण न केवल मंदिर परिसर की शोभा बढ़ाता है, बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत को और सशक्त रूप से स्थापित करता है। यह दुनिया को सनातन आस्था की महिमा, अनुशासन और आध्यात्मिक शक्ति का संदेश देता है।

पीएम मोदी और सीएम योगी की भूमिका को सराहा

संत समाज का कहना है कि इस उपलब्धि तक पहुँचने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
संतों ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने सनातन परंपराओं के संरक्षण, मंदिर संस्कृति के पुनरुद्धार, धार्मिक स्थलों के विकास और संत समाज के सम्मान के लिए जो निर्णायक कदम उठाए हैं, उससे देश की आध्यात्मिक चेतना और अधिक सुदृढ़ हुई है।

अयोध्या मिशन ने दिया नया स्वरूप—संत दिलीप दास

राम वैदेही मंदिर के प्रतिष्ठित संत दिलीप दास ने कहा कि अयोध्या मिशन के अंतर्गत जिस प्रकार से सनातन संस्कृति का पुनरुद्धार हुआ है, वह प्रशंसनीय और अनुकरणीय है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी को धर्म परंपरा की रक्षा का प्रहरी बताते हुए कहा कि उनकी सतत सक्रियता धर्म की स्थापना और संरक्षण को नई दिशा दे रही है।

विवाह पंचमी पर विशेष पूजन-अर्चन

विवाह पंचमी के अवसर पर आयोजित इस प्रतिष्ठा समारोह में साधु-संतों द्वारा प्रभु श्रीराम और माता जानकी के विवाह पर्व का पूजन-अर्चन भी किया गया।
संत समाज का विश्वास है कि यह दिव्य क्षण भारत के उज्ज्वल भविष्य, समाज की आस्था और सनातन परंपरा के आत्मगौरव को और अधिक सशक्त करेगा। उनका मानना है कि धर्म ध्वज का यह आरोहण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरণা और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बनेगा।